कविता : मां मै तेरा होना चाहता हूं

अमर उजाला

अमर उजाला बिहार सारण जिला के रहनेवाले हैं। अभी राजेंद्र महाविद्यालय, छपरा से स्नातक की पढ़ाई कर रहे है।

मां मै तेरा होना चाहता हूं
तेरी बाहों में फिर से सोना चाहता हूं….
मां मै तेरा होना चाहता हूं

तुम बचपन की गरीबी को अमीरी में ढालती थी
मेरी हर एक ख्वाहिश को बेखौफ मानती थी
तुझे कुछ हो ना जाए इस फ़िक्र को ढोना चाहता हूं ….
मां मै तेरा होना चाहता हूं

तूने खुद को तपाया है
मैंने तुम्हें बचपन भर सताया है
तुम अपनी हाथो को जलाकर मुझको रोटी खिलाया है
दुनिया के हर खिलौने तुझे देना चाहता हूं …
मां मै तेरा होना चाहता हूं

जब कभी मै बिस्तर पर पेशाब कर देता था , तेरा गुस्से में मुझे डांटना और मेरे रोने पर तेरा प्यार जताना कैसे भूल जाऊ मैं
कैसे भूल जाऊ मेरे पेशाब पर तेरा खुद सो जाना और मुझे सूखे बिस्तर पर सुलाना
तेरे गले लग कर जी भर के रोना चाहता हूं …
मां मै तेरा होना चाहता हूं

याद है मुझे वो बरसात की राते
कुछ खाने को मांगू तो तेरी झूंठी तस्सली की बाते
आज तुझे जी भर के खिला कर मै भूखा सोना चाहता हूं….
मां मै तेरा होना चाहता हूं ।

 

(नवोदयन्स हाईट्स कॉपीराइट का दावा नहीं करता है। रचना पर लेखक का सर्वाधिकार है।)

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