किसानों का दर्द, लेखक की जुबानी

जीडीपी का 17% कृषि का है। किसानों की स्थिति कुछ प्रदेशो मे बहुत अच्छी है पंजाब कृषि मे काफी आगे है किसान आत्मनिर्भर है । मध्यप्रदेश मे कुछ जगह, कृषि मानसून पर निर्भर है । कृषि मे आने वाली लागत बढती जा रही है किसानो को लाभ कम होता जा रहा है .घाटा बढने पर व अन्य खर्चो के लिए छोटा किसान जमीन बेचने को मजबूर हो जाता है जिनके पास आमदनी का जरिया अच्छा है वो लोग , कमजोर वर्ग से जमीन खरीद रहे है .यही हाल रहा तो किसान ,मजदूर बन जायेगा .एक खास मजबूत वर्ग के पास जमीन इकट्ठा हो जायेगी. गरीब व अमीर मे खाई पैदा हो जायेगी . इसका सामन्जस बनाने की जरूरत है सरकार को ऐसे फैसले लेने होगे कि किसान की आमदनी बढे .उसे अपनी खेती पर मुनाफा हो व अपने परिवार का भरण पोषण अच्छी तरह कर सके . सरकार को आकलंन करना चाहिए कि 10 साल पहले किसान के पास कितनी जमीन थी आज कितनी है . इन आकडो को लेकर सरकार किसानों के लिए योजनालागू करे कि किसानो की जमीन सुरक्षित रहे .

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