गंगाजल से कोरोना इलाज की थ्योरी को ICMR ने क्या किया ?

-NH Desk,New Delhi

देश के सबसे बड़े चिकित्सा शोध संस्थान आईसीएमआर ने गंगाजल से कोरोना वायरस के इलाज करने की थ्योरी को नकार दिया है और इस विषय पर शोध को आगे बढ़ाने से इंकार कर दिया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की एक शाखा नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को कोरोना वायरस के संक्रमण के नैदानिक इलाज( clinical Test) के लिए गंगा जल का परीक्षण करने का प्रस्ताव भेजा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, जल शक्ति मंत्रालय को पिछले महीने सेना के कुछ सेवानिवृत्त अफसरों के एक संगठन ‘अतुल्य गंगा’ की ओर इस वैश्विक महामारी के इलाज के लिए उपयोग करने का सुझाव दिया। जिसके बाद मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को भेज दिया। हालाँकि, लगभग एक महीने बाद आईसीएमआर ने मंत्रालय के इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से साफ तौर पर इंकार कर दिया है।

बता दें कि ‘अतुल्य गंगा’ संगठन ने नेशनल मिशन आफ गंगा को लिखे एक विस्तृत पत्र में दावा किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में गंगा नदी में अच्छे बैक्टीरिया की कई प्रजातियां पाई जाती हैं जो नदी के जल को दिव्य गुणों से भर देती हैं। वैज्ञानिकों ने इस पावन नदी के जल में पाए जाने वाले इन बैक्टीरिया को ‘निंजा वारियर्स’ का नाम दिया गया है। अतुल्य गंगा के संस्थापक सेवानिवृत्त मेजर मनोज केश्वर का कहना है कि इन्हीं खूबियों के कारण गंगा के गंगत्व को पहचान कर कोरोना वायरस के संक्रमण को दूर करने में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

सेना के इन रिटायर अफसरों के संगठन ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखा। उन्होंने अपने पत्र में आईआईटी रुड़की, आईआईटी कानपुर, भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान लखनऊ, इमटेक, सूक्ष्म जैविकीय अध्ययन केंद्र और नीरी के गंगा जल पर किये अनुसंधान के नतीजों का हवाला देते हुए कहा है कि गंगा का वायरस कुछ मामलों में बहुत असरकारक है। विभिन्न अध्ययनों में यह साबित हो चुका कि हैजा, पेचिश, मेनिन्जाइटिस और टीबी जैसी गंभीर रोगों के बैक्टीरिया भी गंगा जल में टिक नहीं पाते। इनका कहना है कि गंगा जल में ‘क्यूरेटिव प्रापर्टी’ है, जो कोरोना जैसी महामारी के इलाज में कारगर साबित हो सकती है।

 

 

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