गोरखपुर विश्वविद्यालय ने परीक्षाओं की तिथि की जारी, छात्र एवं अभिभावकों में नाराजगी

उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री का शहर यानी कि गोरखपुर। आजकल ट्विटर पर चर्चा में है, दरअसल गोरखपुर में एक विश्वविद्यालय है दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय। पूर्वांचल के सबसे पुराने और कुछ गिने-चुने अच्छे शिक्षण संस्थानों में से एक है। यह विश्वविद्यालय अपने सत्र 2019-20 की वार्षिक परीक्षाओं को पुनः कराने हेतु नोटिस जारी किया है।
जैसे ही हम गोरखपुर विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर पहुंचते हैं वर्चुअल नोटिस बोर्ड में सबसे ऊपर जो पहला नोटिस दिखता है। वह शेष वार्षिक परीक्षाओं के संबंध में दिखता है।

परीक्षा के संदर्भ में विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिस
परीक्षा के संदर्भ में विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिस

नोटिस में क्या है?

नोटिस विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक के कार्यालय द्वारा जारी किया गया है। जिस पर विद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की शेष बची हुई वार्षिक परीक्षाओं को पुनः कराने की बात की गई है। आपके लिए नोटिस का पहला पृष्ठ हम नीचे लगा रहे हैं। नोटिस में 7 जुलाई से पुनः परीक्षाएं शुरू कराने की बात की गई है। इसके अनुसार दो पाली में परीक्षाएं होंगी, सुबह 8:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक होने वाली पहली पाली में मुख्य तौर पर अंतिम वर्ष की सारी पाठ्यक्रमों का परीक्षा लिया जाएगा। वही दूसरी पाली में प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षा होगी जिसका समय 2:00 बजे दोपहर से शाम 5:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, इसमें कुछ एक तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम भी शामिल हैं।

परीक्षाओं से समस्या क्या है ?

छात्रों की माने तो उनका कहना है की परीक्षाओं से क्यों डरना? जब डिग्री लेनी ही है और पढ़ने के लिए नामांकन कराया ही है तो परीक्षाओं से डरने के लिए तो कराया नहीं होगा।
डर की असली वजह विश्व भर में फैली कोरोनावायरस है। छात्रों का कहना है कि महामारी के इस दौर में जब सामाजिक व शारीरिक दूरी का नियम पालन करने को कहा जा रहा है। ऐसे में परीक्षा जैसी सामूहिक कार्य का आयोजन कहां तक उचित है? इसको लेकर छात्रों के कुछ सवाल हैं जो लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से और ईमेल के द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। छात्रों के ही शब्दों में उन सवालों को हम नीचे लिख रहे हैं :-

१. कॉलेज जाने के लिए हमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट का हर हाल में प्रयोग करना ही पड़ेगा, तो अगर उसमें कोई कोरोना मरीज़ हुआ तो? उससे हम संक्रमित होंगे, हमसे हमारी कक्षा, फिर?

२. डी•डी•यू• से कापियां कॉलेज आतीं हैं, कॉलेज में आने के उपरांत कोई और उसे ‘हाथों’ से उठा कर रखता है, अगले दिन किसी और के ‘हाथों’ द्वारा हमें वह सौंपा जाता है, इस बीच कोई कोरोना संक्रमित हुआ तो?

३. इस बिमारी के लक्षण भी तुरंत पता तो चलते नहीं हैं, तो ऐसे में अगर हम स्वयं ही संक्रमित हैं और हमारे कारण हमारे मित्र, हमारे शिक्षक या हमारे कॉलेज कैंपस का कोई भी सदस्य संक्रमित हुआ तो? या फिर इन्हीं कुछ लोग के कारण हम छात्र संक्रमित हुए और हमसे हमारे परिवार में कोई संक्रमित हुआ तो?

४. सबसे अहम बात, गोरखपुर और आस पास के इलाकों में, कोई भी परिवार (मध्यमवर्गीय या निम्नवर्गीय) इतनी क्षमता नहीं रखता कि एक-एक लाख की एक व्यक्ति की दवाईयां उपलब्ध करा पाए। ऐसे में कोई भी परिवार अपनी जान को दांव पर क्यों लगाएगा?

५. ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं है कि हमलोग ने पहले परीक्षाएं दी नहीं, या परीक्षाओं से भाग रहे तो प्रमोशन एक विकल्प नहीं है क्या? वो भी तब जब बड़े बड़े विश्वविद्यालयों ने छात्र सुरक्षा का पहले ध्यान रखा है! ऐसे में आप अगर कहते हैं कि पूरी सुरक्षा के साथ परीक्षाएं कराईं जाएंगी तो आप कैम्पस में सुरक्षा मुहैया करा सकते हैं, आप वहां सबसे कह कर मनवा सकते हो कि साथ में ना खड़े रहो परंतु कैम्पस के बाहर? आप कुछ ज्यादा ही इच्छुक बच्चों को “परीक्षा कैसा गया?” सवाल पूछने या बताने से कैसे रोकोगे? कुछ छात्र जो एक दूसरे के साथ आते जाते हैं उन्हें कैसे रोकोगे??

तो ऐसी परिस्थिति में अगर हम में से किसी एक छात्र को कोरोना होता है तो क्या उसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन लेगा?

क्या विश्वविद्यालय प्रशासन इस बात की गारंटी दे सकता है कि हम छात्रों की जान को इस कोरोना के शक्ति बाण से बचाने के लिए कोई हनुमान संजीवनी बूटी ले आएगा??

इसके शुरुआती हिस्से की तस्वीर भी देख लिजिए:

विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों द्वारा भेजे जा रहे ईमेल का प्रारंभिक हिस्सा

शहर से बाहर के छात्रों का भी होना है परीक्षा

इस क्षेत्र में एक अच्छी संस्थान होने के कारण विश्वविद्यालय आसपास के क्षेत्रों छात्रों की बड़ी संख्या यहां पढ़ने आती है। बिहार के सीमावर्ती जिलों के भी छात्र विश्वविद्यालय के मेन कैंपस में अध्ययनरत है। इसके अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों के कॉलेजों में भी बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों से छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे अगर परीक्षा कराई जाएगी तो गौरतलब यह है कि जब सही तरीके से ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं हुआ है और बसों के अंतरराज्यीय आवाजाही भी उतनी सुचारू ढंग से नहीं हो पा रही है, ऐसे में छात्रों के सामने परिवहन एक सबसे बड़ी समस्या है। परिवहन के अलावा एक समस्या यह भी है कि आने वाले छात्र रुकेंगे कहां ? कुछ देर के लिए मान लीजिए कि WHO के निर्देशों का पालन करते हुए विश्वविद्यालय छात्रावासों को पुनः खोल देती है, लेकिन यह सर्वविदित है कि छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की संख्या छात्रावास से बाहर रहने वाले छात्रों की संख्या का बहुत ही कम है। अमूमन छात्र विश्वविद्यालय के आसपास के इलाकों में रूम लेकर रहते हैं। यात्रा करके आने वाले छात्रों को निश्चित ही संदेह की दृष्टि से देखा जाएगा, इस महामारी के दौर में ऐसा होना आम है। उन्हें अगर क्वॉरेंटाइन होना पड़े तो उनकी परीक्षाएं छूट भी सकती हैं।

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विवेक कुमार कुशवाहा
jnvyashu.ysy

कृपया परीक्षा न कराई जाए

इस महामारी के समय मे यदि कोई छात्र बीमार पड़ता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी??? ,विश्वविद्यालय की जिन्होंने यह मूर्खतापूर्ण निर्णय लिया है

2 months ago
श्यामू कुमार
jnvyashu.ysy

Student ko parmote kar dena chahiye

मैं श्यामू कुमार जो की St. Andrew’s College का विद्यार्थी हू और में किराए के मकान में रह कर पढ़ता था । मेरे मकान मालिक ने किराए के लिए ज्यादा जोर किया तो मैंने किराया देकर मकान खाली कर दिया अब एग्जाम का टाइम टेबल आ गया अब मैं कैसे एग्जाम दूंगा मेरे महराजगंज जिला के कुछ एरिया कोरंटाइन हैं अब इस कठिन समय में कैसे में अपना एग्जाम दे पाऊंगा
मेरा कुलपति जी से निवेदन ह कृप्या इसपे विचार करे ,🙏🙏🙏🙏

2 months ago

Review गोरखपुर विश्वविद्यालय ने परीक्षाओं की तिथि की जारी, छात्र एवं अभिभावकों में नाराजगी.

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