जानें देश को शिक्षा व सूचना प्रौद्योगिकी की सौगात देने वाले राजीव गांधी के बारे में

-NH Special Desk

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) अपनी इच्छा के विपरीत राजनीति में आए थे. वह खुद राजनीति को भ्रष्टाचार से मुक्त करना चाहते थे लेकिन यह विडंबना ही है कि उन्हें भ्रष्टाचार की वजह से ही सबसे ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ी. उन्होंने देश में कई क्षेत्रों में नई पहल और शुरुआत की जिनमें संचार क्रांति और कंप्यूटर क्रांति, शिक्षा का प्रसार, 18 साल के युवाओं को मताधिकार, पंचायती राज आदि शामिल हैं. राजीव ने कई साहसिक कदम उठाए जिनमें श्रीलंका में शांति सेना का भेजा जाना, असम समझौता, पंजाब समझौता, मिजोरम समझौता आदि शामिल हैं.

प्रारंभीक जीवन :

राजीव का जन्म 20 अगस्त 1944 में मुंबई में हुआ था.  राजीव गाँधी इंदिरा गाँधी और फ़िरोज़ गाँधी के पुत्र थे. दोनों में अलगाव होने के बाद इंदिरा गाँधी अपने पिता जवाहर लाल नेहरु के घर रहने लगी. राजीव गाँधी यही बड़े हुए, उन्होंने भारत की राजनीती को नेहरु परिवार के होने के नाते करीब से देखा था. इनकी प्राथमिक शिक्षा देहरादून के प्रतिष्ठित विद्यालय से हुई ,जहाँ महानायक अमिताभ बच्चन से इनकी मित्रता हुई . आगे की पढाई इन्होने लन्दन के इम्पीरियल कॉलेज से की, इसके बाद इन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग करने का ऑफर आया.

1965 तक वे कैम्ब्रिज में रहे, लेकिन उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढाई पूरी नहीं की. 1966 में राजीव भारत आ गए, इस समय उनकी माँ इंदिरा गाँधी देश की प्रधानमंत्री बन गई थी. इसके बाद राजीव ने दिल्ली में जाकर फ्लाइंग क्लब से पायलट की ट्रेनिंग ली, और 1970 में एक पायलट के तौर पर इंडियन एयरलाइन में काम करने लगे. जब वे भारत आये उस समय उनके भाई संजय अपनी माँ के साथ भारत की राजनीती में उतर चुके थे.‍

राजीव गांधी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के मशहूर दून स्कूल से पूरी की। जहाँ महानायक अमिताभ बच्चन से इनकी मित्रता हुई। इसके बाद लंदन विश्वविद्यालय ट्रिनिटी कॉलेज और बाद मे कैंब्रिज में इंजिनियरिंग पढाई करने लगे। 1965 तक वे केम्ब्रिज मे रहे। लेकिन उन्होने अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी नही की। 1966 मे वे भारत वापस आ गये। उस टाइम तक उनकी मा इंदिरा गाँधी भारत की प्रधानमंत्री बन चुकी थी। इसके बाद राजीव दिल्ली के फ्लाइंग क्लब से पायलट की ट्रैनिंग ली। और एक कमर्शियल एयरलाइन में पायलट बन गए। उनके छोटे भाई संजय गांधी राजनीति में प्रवेश कर चुके थे और अपनी माँ इंदिरा गांधी के भरोसेमंद प्रतिनिधि बन गए।

कहा जाता हैं राजीव गाँधी का राजनीतिक मे कोई इंटरेस्ट नही था। पर सन 1980 में संजय गाँधी के एक विमान दुर्घटना मृत्यु के बाद मां के कहने पर राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने अपने भाई के पूर्व संसदीय क्षेत्र अमेठी से अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता। और संसद मे जगह बनाए। जल्द ही वह कांग्रेस पार्टी के महासचिव बन गए।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढने के दौरान राजीव गाँधी की मुलाकात एंटोनिया मैनो से हुई, जिनसे वे प्यार कर बैठे और दोनों ने 1969 में शादी कर ली. विवाह के बाद एंटोनिया मैनो का नाम परिवर्तित कर सोनिया गाँधी हो गया. राजीव गाँधी की दो सन्ताने है राहुल और प्रियंका. इनका पूरा परिवार राजनीती से प्रेरित रहा पर इन्हें राजनीती से लगाव नहीं था .आज भी इनकी पत्नी सोनिया गाँधी काँग्रेस की अध्यक्ष है, एवम बेटा राहुल भी सासंद के रूप में कार्यरत है.

भारत लौटने के बाद राजीव गांधी एक कमर्शियल एयरलाइन में पायलट बन गए। इधर, उनके छोटे भाई संजय गांधी राजनीति में प्रवेश कर चुके थे और अपनी माँ इंदिरा गांधी के भरोसेमंद प्रतिनिधि बन गए। सन 1980 में एक विमान दुर्घटना में संजय की मृत्यु के बाद राजीव ने अनिच्छा से अपनी मां के कहने पर राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने अपने भाई के पूर्व संसदीय क्षेत्र अमेठी से अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता। जल्द ही वह कांग्रेस पार्टी के महासचिव बन गए।

अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 40 साल की उम्र में वह भारत के प्रधानमंत्री बने। 1984 में उन्होंने आम चुनावों का आवाहन किया और सहानुभूति की लहर पर सवार होकर कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी जीत दर्ज की। कांग्रेस पार्टी ने निचले सदन की 80 प्रतिशत सीटें जीत कर आजादी के बाद की सबसे बड़ी जीत हांसिल की।

राजीव गांधी ने पंजाब में आतंकवादियों के खिलाफ व्यापक पुलिस और सेना अभियान चलाया। श्रीलंका सरकार और एल टी टी इ विद्रोहियोंके बीच शांति वार्ता के प्रयासों का उल्टा असर हुआ और राजीव की सरकार को एक बढ़ी असफलता का सामना करना पड़ा। 1987 में हस्ताक्षर किये गए शांति समझौते के अनुसार भारतीय शांति सेना को श्रीलंका में एल टी टी इ को नियंत्रण में लाना था पर अविश्वास और संघर्ष की कुछ घटनाओ ने एल टी टी इ आतंकवादियों और भारतीय सैनिकों के बीच एक खुली जंग के रूप में बदल दिया। हजारों भारतीय सैनिक मारे गए और अंततः राजीव गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका से वापस बुला लिया। यह राजीव की एक बड़ी कूटनीतिक विफलता थी।

1985 के आम चुनावों में मिले प्रचंड बहुमत के पीछे जनता जनार्दन की सहानुभूति एक महत्वपूर्ण कारण तो थी ही, मगर प्रधानमंत्री के पद पर राजीव गांधी के आरोहण का एक अन्य मुख्य कारण विभिन्न मसलो पर उनका आधुनिक दृष्टिकोण और युवा उत्साह था. भारतीय लोक्तान्त्रकोको सत्ता के दलालों से मुक्त कराने की बात कहने वाले वे पहले प्रधानमंत्री थे. भ्रष्ट नौकरशाही को भी उन्होंने आड़े हाथो लिया. उन्होंने ही सबसे पहले देश को एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में ‘इक्कीसवी सदी के ओर’ले जाने का नारा देकर जनमानस में नई आशाएं जगाई.

प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने नई शिक्षा नीती की घोषणा की.देश के औद्योगिक विकास के लिए तरह – तरह के आयोग गठित हुए. विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नई गती और दिशा देने के लिए प्रयास तेज किये गये और देश में पहली बार ‘टेक्नोलॉजी मिशन’ एक संस्थागत प्रणाली के रूप में अस्तित्व में आया. राजीव गांधी के पहल पर हुए ऐतिहासिक पंजाब, आसाम, मिझोरम समझौतों के उनकी राजनितिक सूझ – बुझ का परिचय दिया.देश की राजनीती में ये समझौते महत्वपूर्ण पड़ाव थे. उधर अंतरराष्ट्रीय क्षितिज में भी राजीव गांधी एक सशक्त और कुशल राजनेता के रूप में उभरे. अपने शासनकाल में उन्होंने कई देशो की यात्रा की और उनसे भारत के राजनयिक, आर्थिक व सांस्कृतिक संबंध बढाए.

राजीव गांधी की राजनीति में कोई रूचि नहीं थी और वो एक एयरलाइन पाइलट की नौकरी करते थे। आपातकाल के उपरान्त जब इन्दिरा गांधी को सत्ता छोड़नी पड़ी थी, तब कुछ समय के लिए राजीव परिवार के साथ विदेश में रहने चले गए थे। परंतु १९८० में अपने छोटे भाई संजय गांधी की एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद माता इन्दिरा को सहयोग देने के लिए सन् १९८२ में राजीव गांधी ने राजनीति में प्रवेश लिया।

वो अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीत कर सांसद बने और ३१ अक्टूबर १९8४ को सिख आतंकवादियों द्वारा प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या किए जाने के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने और अगले आम चुनावों में सबसे अधिक बहुमत पाकर प्रधानमंत्री बने रहे। उनके प्रधानमंत्रित्व काल में भारतीय सेना द्वारा बोफ़ोर्स तोप की खरीदारी में लिए गये किकबैक (कमीशन – घूस) का मुद्दा उछला, जिसका मुख्य पात्र इटली का एक नागरिक ओटावियो क्वाटोराची था, जो कि सोनिया गांधी का मित्र था। अगले चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और राजीव को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा।

राजीव गांधी ने पंजाब में आतंकवादियों का सफ़ाया करने के लिए व्यापक पुलिस और सेना अभियान चलाया। श्रीलंका सरकार और एल टी टी इ विद्रोहियोंके बीच शांति वार्ता के प्रयासों का उल्टा असर हुआ और राजीव की सरकार को एक बढ़ी असफलता का सामना करना पड़ा। 1987 में हस्ताक्षर किये गए शांति समझौते के अनुसार भारतीय शांति सेना को श्रीलंका में एल टी टी इ को नियंत्रण में लाना था पर अविश्वास और संघर्ष की कुछ घटनाओ ने एल टी टी इ आतंकवादियों और भारतीय सैनिकों के बीच एक खुली जंग के रूप में बदल दिया। हजारों भारतीय सैनिक मारे गए और अंततः राजीव गांधी ने भारतीय सेना को श्रीलंका से वापस बुलाना पढ़ा।

नवंबर 1982 में जब भारत ने एशियाई खेलों की मेजबानी की थी, स्टेडियम के निर्माण एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने संबंधी वर्षों पहले किये गए वादे को पूरा किया गया था। श्री गांधी को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि सारे काम समय पर पूर्ण हों एवं यह सुनिश्चित किया जा सके कि बिना किसी रूकावट एवं खामियों के खेल का आयोजन किया जा सके।

उन्होंने दक्षता एवं निर्बाध समन्वय का प्रदर्शन करते हुए इस चुनौतीपूर्ण कार्य को संपन्न किया। साथ-ही-साथ कांग्रेस के महासचिव के रूप में उन्होंने उसी तन्मयता से काम करते हुए पार्टी संगठन को व्यवस्थित एवं सक्रिय किया। उनके सामने आगे इससे भी अधिक मुश्किल परिस्थितियां आने वाली थीं जिसमें उनके व्यक्तित्व का परीक्षण होना था।

राजीव गांधी भारत के सातवें प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में 1984 से 1989 तक सेवा की। उन्होंने अपनी माता श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री का कार्यालय संभाला। वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी एक समर्थ नेता थे। उन्होंने किसी भी परिस्थिति में अपना धैर्य नहीं खोया। वह दृढ विचारों वाले व्यक्ति थे। उन्होंने यदि कुछ करने की थान ली, तो उसे पूर्ण कर के ही दम लेते थे। उनके नेतृत्व में देश अपने को सुरक्षित महसूस कर रहा था। उन्होंने भारत को सूचना और प्रौद्योगिकी तथा कम्प्यूटरीकरण का सपना दिखाया

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