देव कुमार द्वारा आदिम जनजाति पर लिखी पुस्तक “बिरहोर- हिंदी- अंग्रेजी शब्दकोश” की देश-विदेश में हो रही सराहना

NH DESK, JHARKHAND

जलेश्वर महतो

झारखंड राज्य के रांची जिले से ओरमांझी के रहने वाले युवा लेखक देव कुमार; वर्तमान समय में जेएसएलपीएस ग्रामीण विभाग अंतर्गत प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक के पद पर कार्यरत ने विलुप्त हो रहे आदिम जनजाति बिरहोर पर “बिरहोर- हिंदी- अंग्रेजी शब्दकोश” का निर्माण कर बिरहोरों की भाषा को संरक्षित और आदिवासी संस्कृति को अक्षुण्ण रखने का प्रयास किया है!
मौलिक रूप से यह पुस्तक आपको समाज के पिछड़े तबके के जीवन शैली की जीवंतता का आभास कराती है! संभवत यह झारखंड की पहली ऐसी पुस्तक है जो आपको विलुप्त होती भाषा एवं आदिम संस्कृति से अवगत कराने हेतु प्रयासरत होगी! पुस्तक में बिरहोर जनजातियों द्वारा दैनिक जीवन में बोलचाल में प्रयुक्त होने वाली शब्दावली का समावेश किया गया है जो इनकी संस्कृति, परंपरा एवं रीती रिवाज का एहसास कराती है! पुस्तक का निर्माण अनेक बिरहोर समुदाय के बीच जाकर उनके धरातलीय विशेषताओं को समेटने के अनेक प्रयासों के फलस्वरूप संभव हो पाया है! “बिरहोर- हिंदी- अंग्रेजी शब्दकोश” तीन भाषाओं में चित्रों के माध्यम से लिखी गई है! इस शब्दकोश को कुल 12 अध्यायों में विभक्त किया गया है! प्रत्येक शब्दावली को बच्चों की मनोवृति का ख्याल रखते हुए रंग-बिरंगे सुंदर चित्रों से प्रस्तुत किया गया है!
ज्ञात हो कि यूनेस्को द्वारा बिरहोर भाषा को गंभीर खतरे की भाषा में शामिल किया गया है! इसे देखते हुए देश विदेश के लेखकों विकास कार्यों से जुड़े प्रोफेसनलों, साहित्यकारों, भाषा विद्वानों एवं शोधकर्ताओं द्वारा इस पुस्तक की सराहना की जा रही है! शोध विद्वान, कील विश्वविद्यालय, जर्मनी के डॉ नेत्रा पी पोडयाल,यरोपियन यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्ट एंड ईस्ट, नीदरलैंड के कुलपति प्रो0 मोहन के गौतम, खोरठा भाषा के लेखक डॉ दिनेश दिनमनी ने पुस्तक की सराहना करते हुए लेखक को बधाई संदेश भेजा है!
राज्य सरकार के भाषा संरक्षण तथा कला एवं संस्कृति विभाग, आदिवासी विकास संस्थान एवं शिक्षा परिषद द्वारा ऐसी पुस्तकों को पाठ्यक्रमों में शामिल किए जाने पर यह झारखंड से विलुप्तप्राय बिरहोर जनजाति की मातृभाषा के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी! झारखंड राज्य की जनगणना 2011 के अनुसार बिरहोर जनजाति की जनसंख्या मात्र 10,726 है और ये बिरहोर जनजाति राज्य में सामान्यतः हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, चतरा, रामगढ़ एवं रांची में पाए जाते हैं!

Review देव कुमार द्वारा आदिम जनजाति पर लिखी पुस्तक “बिरहोर- हिंदी- अंग्रेजी शब्दकोश” की देश-विदेश में हो रही सराहना.

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