देशी बनाम विदेशी में फंसी वायुसेना के लड़ाकू विमान की खरीदी

-NH Desk,New Delhi

(हि.स.)। वायुसेना के लिए फाइटर प्लेन खरीदने का मुद्दा देशी बनाम विदेशी में फंसता दिख रहा है। वायुसेना प्रमुख 114 विदेशी लड़ाकू फाइटर प्लेन के साथ 83 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस को भी खरीदने की बात कर रहे हैं तो सैन्य बलों के प्रमुख (सीडीएस) ने सिर्फ स्वदेशी एलसीए को ही वायुसेना के बेड़े में शामिल करने की बात कही है।
वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने सोमवार को एक बयान में कहा कि अगले कुछ महीनों में 47,000 करोड़ रुपये की एलसीए लड़ाकू विमान परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसमें 8 हजार करोड़ की लागत से मई माह के अंत तक एलसीए की दूसरी स्क्वाड्रन सुलूर में तैनात की जाएगी। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत पहले से ही हमारा 40 एलसीए लड़ाकू विमान का समझौता हो गया है। मुझे आशा है कि अगले 3 महीनों में एलसीए मार्क वन भी साइन हो जाएगा।
एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया का कहना है कि वायुसेना की योजना एलसीए तेजस के अलावा 114 विदेशी लड़ाकू विमानों को भी खरीदने की है। भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने वाले विमानों की सूची में 36 राफेल, 114 मल्टीरोल लड़ाकू विमान, 100 उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) और 200 से अधिक एलसीए शामिल हैं। उनका मानना है कि 114 विदेशी जेट्स इसलिए खरीदना जरूरी है क्योंकि इनकी भरपाई 83 एलसीए विमानों से नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों लड़ाकू विमानों की अलग-अलग क्षमताएं हैं।
इस तरह वायुसेना प्रमुख भदौरिया सैन्य बलों के प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के उस बयान से अलग राय रखते हैं जिसमें उन्होंने 15 मई को कहा था कि वायुसेना विदेशी 114 जेट्स के बजाय सिर्फ स्वदेशी एलसीए तेजस खरीदने की योजना बना रही है। सीडीएस बिपिन रावत ने कहा था कि अब वायुसेना के लिए भारत में ही एयरक्राफ्ट बनेंगे और विदेशों से करोड़ों के विमानों की खरीददारी नहीं की जाएगी। दरअसल अप्रैल 2018 में भारत ने 114 जेट खरीदने का एक ग्लोबल टेंडर निकाला था। इसके लिए बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और स्वीडन की साब एबी से 15 अरब डॉलर की डील चल रही थी। इनमें से करीब 85 फीसदी एयरक्राफ्ट भारत में ही तैयार होने थे।
इसी डील को नकारते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत ने 15 मई को कहा था कि भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में हल्के लड़ाकू विमान शामिल करना चाहती है जो भारत में ही बने हों। तेजस जैसे एयरक्राफ्ट हमारे पुराने होते विमानों के बेड़े की क्षमता को बढ़ाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि वायुसेना अब 6 अरब डॉलर में 83 तेजस जेट खरीदेगी। रावत ने ये भी कहा कि अब भारत डिफेंस एक्सपोर्टर की तरह भी एक बड़ा रोल अदा करेगा, क्योंकि यहां कीमतें काफी कम हैं। जब दुनिया भारत को इन विमानों का इस्तेमाल करते देखेगी, तो बेशक ही कुछ देश इसे खरीदने में रुचि लेंगे।
कुल मिलाकर वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया और चीफ आर्मी ऑफ स्टाफ (सीडीएस) विपिन रावत के परस्पर विरोधी बयानों से एयरफोर्स के लिए फाइटर प्लेन की खरीददारी का मुद्दा देशी बनाम विदेशी में फंसा है।

 

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