नए घराने के रूप में लोकप्रिय हो रहा प्रभात संगीत, 39 वां प्रभात संगीत दिवस मनाया गया

 

NH DESK

जलेश्वर कुमार महतो-NH-24

आनंद मार्ग प्रचारक संघ हजारीबाग की सांस्कृतिक संस्था ’रावा’ की ओर से मंगलवार को आनंदपुरी कॉलोनी स्थित आनन्द मार्ग जागृति में प्रभात संगीत दिवस मनाया गया। इस दौरान मार्गी लोगो द्वारा प्रभात संगीत पर आधारित गायन की प्रस्तुति की गई।

हज़ारीबाग, इचाक, नगवा, पदमा, हेदलाग, जलमा, नरसिंह स्थान, अंबाडीह में भी पूरे उत्साह के साथ प्रभात संगीत दिवस मनाया गया और पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया गया।

अवधुतिका आनंद राजिता आचार्या ने कहा कि साधक के जीवन में प्रभात संगीत का महत्वखपूर्ण योगदान है क्योंकि यह साधना को उच्च स्तर तक पहुंचाने में सहायता करता है। आनंद मार्ग में गीत-संगीत का विशेष महत्व है। आनंद मार्ग के प्रवर्तक श्री श्री आनंदमूर्ति जी उर्फ श्री प्रभात रंजन सरकार ने 14 सितंबर 1982 में प्रथम प्रभात संगीत “बंधु हे निये चलो” बांग्ला भाषा में देकर मानव मन को भक्ति उन्‍मुख किया था। आठ वर्ष एक महीना सात दिन की अवधि में उन्होंने 5018 प्रभात संगीत का अवदान मानव समाज को दिया। यही प्रभात संगीत वर्तमान में नए घराने के रूप में लोकप्रिय हो रहा है।

जिला के धर्म प्रचार सचिव राजेंद्र राणा दादा ने बताया कि योगेश्वर श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने पृथ्वी पर उपस्थित मनुष्य के मन में ईश्वर के लिए उठने वाले हर प्रकार के भाव को सुंदर भाषा और सुर में लयबद्ध कर प्रभात संगीत के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कोई भी मनुष्य जब पूर्ण भाव से प्रभात संगीत के साथ खड़ा हो जाता है, तो रेगिस्तान भी हरा हो जाता है। संगीत तथा भक्ति संगीत दोनों को ही रहस्यवाद से प्रेरणा मिलती रहती है। जितनी भी सूक्ष्म तथा दैवी अभिव्यक्तियां हैं, वह संगीत के माध्यम से ही अभिव्यक्त हो सकती हैं। मनुष्य जीवन की यात्रा विशेषकर अध्यात्मिक पगडंडियां प्रभात संगीत के सुर से सुगंधित हो उठता है।

भूक्ती प्रधान गंगेश्वर दादा ने बताया कि प्रभात संगीत के भाव, भाषा, छंद, सुर एवं लय अद्वितीय और अतुलनीय हैं। संस्कृत, बांग्ला, उर्दू, हिंदी, अंगिका, मैथिली, मगही एवं अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत प्रभात संगीत मानव मन में ईश्वर प्रेम के प्रकाश फैलाने का काम करता है। संगीत साधना में तल्लीन साधक एक बार प्रभात संगीत का साधना करना चाहता है। उन्होंने आगे बताया कि लगभग सात हजार वर्ष पूर्व भगवान सदाशिव ने सरगम का आविष्कार कर मानव मन के सूक्ष्म अभिव्यक्तियों को प्रकट करने का सहज रास्ता खोल दिया था।

(यूपी वाई एफ) के राष्ट्रीय सचिव ज्योति रंजन ने बताया कि ये भावपूर्ण प्रभात संगीत गंधर्व माइक्रोवाइटा को आकर्षित कर एक सुदृढ़ वातावरण तैयार करते हैं जिससे आध्यात्मिक उत्तरोत्तर प्रगति होती है। इन सभी गीतों में शिव-कृष्ण स्तुति, जीवन के प्रत्येक पड़ाव जन्म–मरण, विवाह, पौधरोपण, नववर्ष, बालमन, होली, दिवाली, विरह, हास्य  सहित सभी का समावेश है।
राज्य के देवघर से शुरू हुए आशा के इस गीत को गाकर कई जिंदगियां संवर गईं।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अवधुतिका आनंद राजिता आचार्या, धर्म प्रचार सचिव राजेन्द्र राणा दादा, भूक्ती प्रधान गंगेश्वर दादा, यूपी वाई एफ के राष्ट्रीय सचिव ज्योति रंजन,परमेश्वर दादा, युगल रजक, देवाशीष दादा, भीष्म दादा,अयोध्या दादा, दिनेश दादा, धनंजय दादा, देवकी दादा, राजकुमार दादा, परमेश्वर दादा, लक्ष्मण दादा, प्रमोद दादा, आनंद भुसन योगी, शंभू दादा, पवन दादा, बैदनाथ दादा, गोविंद दादा और समस्त मार्गी ने अपना बहुमूल्य सहयोग दिया।

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