नियोजन में भाषा को लेकर बेवजह विवाद खड़ा कर रहा है विपक्ष, हर विभाग में बनाई जा रही है नियुक्ति नियमावली: हेमंत सोरेन

NH DESK JHARKHAND

सिटी रिपोर्टर रांची- जलेश कुमार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. केंद्र के पास झारखंड का करोड़ों रुपया बकाया है. राज्य का बकाया पैसा तो केंद्र नहीं दे रहा है, लेकिन हमारे खाते से DVC के नाम पर हजारों करोड़ बिना बताए काट लिया जा रहा है. यह असंवैधानिक है.

झारखंड में मॉनसून सत्र का समापन हो चुका है. मॉनसून सत्र में पहले दिन से अंतिम दिन तक बीजेपी विधायकों का हंगामा देखने को मिला. सत्र के समापन के मौके पर सदन के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महीने भर बाद बड़े पैमाने पर नियुक्ति की शुरुआत होने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार JPSC की नियुक्ति नियमावली बनाई गई है. जिस तरीके से सरकार झारखंड को मजबूत करने की नींव डाल रही है, अब आगे परेशानी नहीं होगी. हर विभाग में नियुक्ति नियमावली बनाई जा रही है. सत्ता के बगैर बीजेपी का हाल बिन पानी मछली वाला हो गया है.
झारखंड विधानसभा का मॉनसून सत्र बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. समापन भाषण में मुख्यमंत्री के निशाने पर भाजपा रही. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र को तार-तार कर दिया है. सत्ता के बिना भाजपा की स्थिति पानी बिना मछली वाली हो गई है. वह ऐन-केन प्रकारेण सत्ता हथियाना चाहती है. लेकिन ऐसे लोगों को राजनीतिक दल नहीं, बल्कि जनता जवाब देती है. अभी बंगाल चुनाव में जनता ने इन्हें जवाब दे दिया है. यह सिलसिला रुकनेवाला नहीं है. लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है जनता और वह इन्हें सबक सिखाने में लगी है. बंगाल में चुनाव हो रहा था लेकिन ऐसा लग रहा था कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हो रहा हो. भाजपा जनता की सेवा क्या करेगी, वह तो विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा पा रही है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. केंद्र के पास झारखंड का करोड़ों रुपया बकाया है. राज्य का बकाया पैसा तो केंद्र नहीं दे रहा है, लेकिन हमारे खाते से DVC के नाम पर हजारों करोड़ बिना बताए काट लिया जा रहा है. यह असंवैधानिक है. हम निर्णय ले सकते हैं. अगर निर्णय लिया तो केंद्र सरकार अंधेरे में चली जाएगी. लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि नियोजन में भाषा को लेकर विपक्ष विवाद खड़ा कर रहा है. नियोजन नीति में भाषा को समाहित करना गैरकानूनी नहीं है. क्या भाषा हमारी संस्कृति नहीं है, क्या भाषा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. पूर्व की सरकारों ने भाषा को बढ़ावा नहीं दिया. खतियान धारी लोगों और आदिवासियों की संख्या घाटी है. हमें गर्व है कि भाषा को संरक्षित कर रहे हैं. हमारा प्रयास है कि हरसंभव यहां के लोगों को नियोजित किया जाए.

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