प्रशासन और साहित्य का अद्भुत संगम : कृष्ण कुमार यादव

डाक निदेशक कृष्ण कुमार यादव

भारत सरकार की सिविल सेवाओं में सफल प्रथम नवोदयी विद्यार्थी कृष्ण कुमार यादव


-NH Desk,Lucknow

नवोदय विद्यालय से शिक्षा पूरी कर तमाम विद्यार्थियों ने अपने कैरियर बनाये और विभिन्न क्षेत्रों में नाम रोशन कर रहे हैं। इनमें एक नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आता है जवाहर नवोदय विद्यालय,जीयनपुर (आजमगढ़, उप्र) के प्रथम बैच (1987-88) के विद्यार्थी रहे श्री कृष्ण कुमार यादव का। वर्ष 2000 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आई.ए.एस.व अन्य सेवाओं के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा में आपने अपने प्रथम प्रयास में ही सफलता प्राप्त की और इंडियन पोस्टल सर्विसेज के अधिकारी बने। उस समय तक  देश भर के नवोदय विद्यालयों से आई.ए.एस. परीक्षा पास करने वाले आप प्रथम विद्यार्थी बने। आपकी सफलता ने न सिर्फ नवोदय विद्यालय समिति में उत्साह का संचार किया, बल्कि तमाम नवोदयी विद्यार्थियों के आप प्रेरणास्रोत भी बने। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्री कृष्ण कुमार यादव एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ सामाजिक, साहित्यिक और समसामयिक मुद्दों से सम्बंधित विषयों पर प्रमुखता से लेखन करने वाले चर्चित साहित्यकार, विचारक और ब्लॉगर भी हैं। देश-दुनिया की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में ससम्मान स्थान पाने वाले श्री यादव की विभिन्न विधाओं में सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश में लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएँ जैसे अहम पद पर कार्यरत हैं।

आईये इस अंक में विस्तार से जानते हैं इस बहुआयामी नवोदयी शख्शियत के बारे में –
प्रशासनिक सेवा में रहकर चिन्तन मनन करना एवं साहित्यिक लेखन करना अपने आप में एक विशिष्ट उपलब्धि है। राजकीय सेवा के दायित्वों का निर्वहन और श्रेष्ठ कृतियों की सर्जना का यह मणि-कांचन योग विरले ही मिलता है। समकालीन साहित्यकारों में चर्चित कवि, लेखक, ब्लॉगर व चिन्तक एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव इस विरल योग के ही प्रतीक हैं।
साहित्य जगत में यह गौरव प्राप्त कि परिवार की तीन पीढ़ियाँ  एक साथ हिंदी साहित्य, लेखन और ब्लॉगिंग में सक्रिय हैं । पिता श्री राम शिव मूर्ति यादव जी के साथ-साथ जीवन-संगिनी श्रीमती आकांक्षा यादव और दोनों पुत्रियाँ अक्षिता (पाखी) व अपूर्वा भी लेखन और ब्लॉगिंग में सक्रिय हैं। बिटिया अक्षिता को भारत सरकार द्वारा सबसे कम उम्र में “राष्ट्रीय बाल पुरस्कार” पाने का भी गौरव प्राप्त है। 10 अगस्त 1977 को तहबरपुर, आजमगढ़ (उ0प्र0) में जन्मे श्री कृष्ण कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय-आजमगढ़ एवं तत्पश्चात इलाहाबाद वि.वि. से 1999 में राजनीति शास्त्र में एम.ए. किया। वर्ष 2001 में प्रथम प्रयास में ही भारत की प्रतिष्ठित ‘सिविल सेवा’ में चयन पश्चात आप ‘भारतीय डाक सेवा’ के अधिकारी बने । सूरत, लखनऊ, कानपुर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, इलाहाबाद, जोधपुर में विभिन्न पदों पर नियुक्ति के पश्चात फिलहाल लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र, उप्र  में निदेशक पद पर आसीन श्री यादव प्रशासन के साथ-साथ साहित्य, लेखन और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में भी चर्चित नाम हैं।
देश-विदेश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट पर वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर निरंतर प्रकाशित होने वाले श्री कृष्ण कुमार यादव की विभिन्न विधाओं में अब तक कुल 7 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं-‘अभिलाषा’ (काव्य-संग्रह, 2005), ‘अभिव्यक्तियों के बहाने’ व ‘अनुभूतियाँ और विमर्श’ (निबंध-संग्रह, 2006 व 2007), ‘India Post : 150 Glorious Years’ (2006), ‘क्रांति-यज्ञ : 1857-1947 की गाथा’, ‘जंगल में क्रिकेट’ (बाल-गीत संग्रह, 2012) व ’16 आने 16 लोग’ (निबंध-संग्रह, 2014)। शताधिक पुस्तकों/संकलनों  में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होने के साथ-साथ आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, जोधपुर व पोर्टब्लेयर और दूरदर्शन से आपकी कविताएँ, वार्ता, साक्षात्कार का समय-समय पर प्रसारण होता रहता है। यही नहीं, आपके व्यक्तित्व-कृतित्व पर एक पुस्तक ‘बढ़ते चरण शिखर की ओर : कृष्ण कुमार यादव’ (सं0- दुर्गाचरण मिश्र, 2009) भी प्रकाशित हो चुकी है।
श्री कृष्ण कुमार यादव को साहित्य विरासत की बजाय आत्मान्वेषण और आत्मभिव्यक्ति के संघर्ष से प्राप्त हुआ है। निरन्तर सजग होते आत्मबोध ने उनकी विलक्षण रचनाधर्मिता को प्रखरता और सोद्देश्यता से सम्पन्न किया है। उनकी रचनाओं में मात्र कोरी बौद्धिकता नहीं, जीवन सम्बन्धी आत्मीय अनुभूतियाँ हैं, संवेदनात्मक संस्पर्श हैं, सामाजिक संचेतना है, समय की जटिलताओं के मध्य भावों की संप्रेषणीयता है। सारगर्भित, सुन्दर, सुस्पष्ट व सार्थक रूप में इन रचनाओं में जीवन की लय है, विचार हैं, प्रभान्विति है, जिसके चलते अपनी रचनाओं में श्री यादव विषय-वस्तुओं का यथार्थ विशेलषण करते हुये उनका असली चेहरा पाठकों के सामने प्रस्तुत करते हैं।
श्री कृष्ण कुमार यादव को देश-विदेश में विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक-साहित्यिक संस्थाओं द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ.साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु शताधिक सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त हैं। उ.प्र. के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा जी न्यूज का ’’अवध सम्मान’’, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी द्वारा ’’साहित्य-सम्मान’’, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री शेखर दत्त द्वारा ’’विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान’’ से विभूषित श्री यादव को अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन, नेपाल में ‘’परिकल्पना साहित्य सम्मान’’,  विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डाक्टरेट (विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘‘, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, वैदिक क्रांति परिषद, देहरादून द्वारा ‘’श्रीमती सरस्वती सिंहजी सम्मान‘’, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान‘‘, आगमन संस्था, दिल्ली द्वारा ‘‘दुष्यंत कुमार सम्मान‘‘, विश्व हिंदी साहित्य संस्थान, इलाहाबाद द्वारा ‘‘साहित्य गौरव‘‘ सम्मान, सहित शताधिक सम्मान प्राप्त हैं।
विभागीय दायित्वों और हिन्दी के प्रचार-प्रसार के क्रम में अब तक आप लंदन, फ़्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, भूटान, श्रीलंका, नेपाल जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। इंटरनेट पर हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और ब्लागिंग के माध्यम से भी देश-विदेश में अपनी रचनाधर्मिता को विस्तृत आयाम देने वाले श्री कृष्ण कुमार यादव हिंदी ब्लॉगिंग में एक चर्चित नाम हैं। शब्द सृजन की ओर (http://kkyadav.blogspot.in) और  डाकिया डाक लाया (http://dakbabu.blogspot.in) आपके चर्चित ब्लॉग हैं । ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉगर दम्पति’’  और  ’’परिकल्पना ब्लॉगिंग सार्क शिखर सम्मान’’ सहित नेपाल, भूटान और श्रीलंका सहित तमाम देशों में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ब्लॉगर्स सम्मेलन में आप सम्मानित हो चुके हैं।
श्री कृष्ण कुमार यादव के सम्बन्ध में हाल ही में दिवंगत पद्मभूषण श्री गोपाल दास ‘नीरज‘ जी के शब्द गौर करने लायक हैं-‘‘कृष्ण कुमार यादव यद्यपि एक उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी हैं, किन्तु फिर भी उनके भीतर जो एक सहज कवि है वह उन्हें एक श्रेष्ठ रचनाकार के रूप में प्रस्तुत करने के लिए निरन्तर बेचैन रहता है। उनमें बुद्धि और हृदय का एक अपूर्व सन्तुलन है। वो व्यक्तिनिष्ठ नहीं समाजनिष्ठ कवि हैं जो वर्तमान परिवेश की विद्रूपताओं, विसंगतियों, षडयन्त्रों और पाखण्डों का बड़ी मार्मिकता के साथ उद्घाटन करते हैं।’’



Review प्रशासन और साहित्य का अद्भुत संगम : कृष्ण कुमार यादव.

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