पड़ोसी गए घर, बिहार के छात्रों में नाराजगी

   
-Yashashwi Yashwant
लॉकडाउन के बीच कोटा के शैक्षणिक क्षेत्रों में गत शुक्रवार बसों की लंबी कतार लग गई। छात्र अपने घरों से निकल सड़क पर कतार में लग गए। जरूरी प्रक्रियाओं का पालन हुआ, फिर बसें वहां से रवाना हो गई। ये बसें उत्तरप्रदेश सरकार की थी और ये बच्चे भी यू.पी. के ही थे जो कोटा में मेडिकल, इंजीनियरिंग, आदि परीक्षाओं की तैयारी हेतु गए थे। इन्हे उत्तरप्रदेश सरकार ने केंद्र और राजस्थान सरकार के साथ बातचीत के बाद घर वापस लाने का फैसला किया था। लगभग 250 बसों से 7500 छात्रों को राजस्थान के कोटा से यूपी स्थित उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है। जब तक रह रिपोर्ट की जा रही है, यूपी के विभिन्न जिलों से हमारे संवाददाता बच्चों के पहुंचने की खबरें दे रहें है। 
   यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ का यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका। कई अन्य राज्यों ने भी अपने छात्रों की वापसी के लिए आवश्यक प्रयास आरंभ कर दिए है। ऐसे में यूपी का पड़ोसी राज्य बिहार अपने छात्रों को लेकर उतना गंभीर नहीं दिख रहा है। गौरतलब है कि कोटा में बिहार के 6500 से अधिक छात्र हैं। इन छात्रों की वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार कंपेन चलाए जा रहे है। पप्पू यादव, तेजस्वी यादव, प्रशांत किशोर समेत कई अन्य  विपक्षी नेताओं ने नीतीश कुमार पर उनके उदासीन रवैये को लेकर निशाना साधा है। कई लोग ने तो इस काम में मुख्यमंत्री की सहायता के लिए आगे आने की बात भी कही है। लेकिन अभी तक सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
क्यों घर आना चाहते हैं छात्र?
       राजस्थान में कोटा 99 कोरोना पॉजिटिव के साथ चौथे स्थान पर है। प्रतिदिन कोटा में संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है, ऐसे में संक्रमण का खतरा ज्यादा है। कोटा में रहने वाले प्रतियोगी छात्र काफी सघन इलाकों में रहते है और वे भोजन के लिए भी बाहरी स्रोतों पर आश्रित है। ऐसे में जब देशव्यापी लॉकडाउन चल रहा है तो यह जाहिर सी बात है कि भोजन को लेकर काफी तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है। शुरुआती दिनों में मेस ने भी अपनी सुविधाएं बंद कर दीं थी, हालांकि अभी कोचिंग संस्थानों के दबाव और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद से मेस मालिकों ने होम डिलीवरी की सेवाएं शुरु कर दीं है। 
कोटा में रह रहे छात्रों का कहना है कि भोजन हमें उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन उसकी क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं होती। कभी कभी समय से खाना पहुंच भी नहीं पाता, ससमय खाना नहीं मिलने से अस्वस्थ होने का भी डर है। 
दूसरी तरफ संक्रमण में बढ़ोत्तरी को देखते हुए उनके माता-पिता भी परेशान है। हमारे संवाददाता से बातचीत के दौरान बिहार के कई अभिभावकों ने कहां कि भोजन बाहरी स्रोतों से प्राप्त हो रहा है, ऐसे में यह खतरा है कि डिलीवरी ब्वॉय या कोई और मेस कर्मी अगर संक्रमित हो तो वह कई बच्चों की जान जोखिम में डाल सकता है। इसके अलावा बच्चें घर से दूर अकेले है और इनमें ज्यादातर बच्चें 18 या उससे कम के हैं, अगर ऐसे बच्चों को कुछ हो जाता है तो बच्चों की परेशानी ज्यादा  सकती है। वहां गार्जियनशिप की भी कमी है क्योंकि बहुत सारे छात्र किसी हॉस्टल में न रहकर किराये के कमरों में रहते हैं।
क्या कर रही है सरकार?
यूपी के बाद कई अन्य राज्य भी अपने छात्रों के वापसी की तैयारी में हैं और आवश्यक प्रक्रियाओं पर कम हो रहा है। इससे इतर बिहार सरकार लगातार लॉकडाउन का हवाला देकर बचती नजर आ रही है। बिहार सरकार के मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि हमारी सरकार लॉकडाउन में फंसे बिहार के सभी लोगों तक आवश्यक मदद पहुंचाने में जुटी है। किसी को भी घर लाना ऐसे वक्त में देशव्यापी लॉकडाउन का उल्लंघन है। 
       फिलहाल अभी देश भर में फंसे बिहारियों को सरकार एक एप्प के माध्यम से 1000 रुपये की राहत दे रही है, जिसका लाभ कोटा के छात्रों को भी मिल रहा है। इसके अलावा कोई अन्य व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है इसकी कोई जानकारी सोशल डोमेन में नहीं आई है। 
कैसे मिलेगा राहत कोष का लाभ?
आपको इसके लिए http://aapda.bih.nic.in पर जाना होगा। वहां नीचे स्क्रोल करने पर आपको एप्प का लिंक मिलेगा। वहां से एप्प डाउनलोड करने के बाद उसे मोबाइल फोन में इंस्टाल करना है। फिर एप्प में पूछी गई जानकारियों के जवाब के साथ अपना आधार और फोटो अपलोड करना है। इसके बाद ओटीपी और लोकेशन एक्सेस के माध्यम से आपका वेरिफिकेशन होगा। इसके बाद आपके खाते में एक हजार रुपया सरकार द्वारा भेजी जाएगी। इसके लिए बिहार का बना आधारकार्ड और बिहार के किसी बैंक शाखा का अकाउंट होना अनिवार्य है।

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