बाराबंकी में कोरोना बम के लिए वरदान बना होम क्वॉरेंटाइन ? (सम्पादकीय)

– के.के. द्विवेदी

  • अधिकांश निगरानी समितियां बस कागजों की शोभा?
  • कई इलाकों में खुलेआम होता है लॉक डाउन का उल्लंघन ।
  • जिला प्रशासन के ढोल की आवाज तेज, जमीनी प्रयास निस्तेज।

कोरोना संक्रमित मरीजों की एकाएक बढ़ी संख्या से पूरे जनपद में खलबली मची हुई है। जिला प्रशासन लाख कहे कि चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन कटु सत्य यह है कि आम नागरिकों के दिलों में यह चिंता खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ज्यादातर लोग कोरोना बम के लिए होम क्वॉरेंटाइन की व्यवस्था को वरदान मान रहे हैं? यही नहीं कई इलाकों में खुलेआम लॉक डाउन के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। तो वही प्रशासन के कार्यों का ढोल भले ही खूब तेज बजाया जा रहा हो परंतु जमीनी स्तर पर यह निस्तेज ही नजर आता है?

प्रदेश की राजधानी लखनऊ से बिल्कुल सटे बाराबंकी जनपद में इस समय महामारी कोरोना का जलवा और अथवा उसकी दहशत लोगों के सिर पर चढ़कर बोल रही है। लालफीताशाही के सामने चुप्पी साधे लोग बस अंदर ही अंदर कुढ़ते दिख रहे हैं ।अभी पूर्व में जिस तरह से जिले में एकाएक संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ी उसने जनपद वासियों को हिला कर रख दिया।यह संख्या प्रवासी मजदूरों अथवा कामगारों के जनपद में पहुंचने से बढ़ती नजर आई है? खबर यह भी है कि कुछ लोग इसमें ऐसे भी हैं जो संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए! वैसे तो जिला प्रशासन ने जब से इस महामारी के विरुद्ध जंग शुरू हुई है तभी से एक से एक बढ़कर प्रयास किए जाने के दावों को चिल्ला चिल्ला कर बताता दिखाई दिया है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। यदि कुछ एक स्थलों को छोड़ दिया जाए तो जनपद के ज्यादातर हिस्सों को भगवान के भरोसे ही माना जा सकता है। लोगों से की गई वार्ता में जो तथ्य उभरकर सामने आ रहे हैं उसमें अधिकांश जनपद वासी प्रवासी आगंतुकों को होम क्वॉरेंटाइन किए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

लोगों का कहना है कि बाहर से आया हुआ गांव मोहल्ले का व्यक्ति मनमाने ढंग से इधर-उधर घूमता है। यदि उसका कोई विरोध भी करे तो मामला आपसी रंजिश अथवा दुश्मनी तक पहुंचता है। इसलिए सरकार अथवा प्रशासन को शेल्टर होम की व्यवस्था करनी ही चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि जो निगरानी समितियां जिला प्रशासन के सरकारी कागजों की शोभा बनी हुई हैं उनमें से अधिकांशतया बस कागजी शोभा बनकर ही रह गई हैं? कुछ लोगों ने तो यहां तक कह डाला कि कई प्रधान अथवा कई प्रधान पद के संभावित प्रत्याशी इस संकट के समय भी अपने वोटों की खोज करते नजर आ रहे हैं ?

किए गए सर्वे के मुताबिक बात करें जनपद में हॉटस्पॉट बनाए गए स्थलों की तो वहां भी प्रशासन कई अराजक लोगों के सामने पानी मांगता नजर आता है? कई स्थानों पर तो मनबढो ने प्रशासन के द्वारा लगाई गई बल्लियों तक को किनारे कर दिया। यही नहीं जिला प्रशासन की डोर टू डोर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की व्यवस्था भी फेल ही है? यदि हैदरगढ़ नगर पंचायत को ही उदाहरण के लिए लिया जाए तो यहां पर यह व्यवस्था भी बस रेंगती दिखती है! खास बात यह है कि ऐसे ही हालात जनपद के अन्य क्षेत्रों में भी दिखते हैं? अधिकारी बहुत जल्दी फोन ही नहीं उठाते !यदि फोन उठ भी गया, उनसे कोई शिकायत भी होती है तो वह सच को स्वीकार करने के लिए तैयार ही नहीं हैं? सारे नियम बस उन नागरिकों के लिए है जो बेचारे नियमों का पालन करते हैं ।जो नियम तोड़ते हैं वह प्रशासन को दिखाई ही नहीं देते ।

कई स्थानों पर यह भी देखा गया है कि जब लोगों को आवश्यक वस्तुएं नहीं मिलती तब वह मजबूरी में लॉक डाउन के नियमों को तोड़ते दिखाई देते हैं? ईमानदारी से यदि हॉटस्पॉट बनाए गए क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया जाए तो सारी असलियत खुल कर सामने आ जाएगी! जनपद के लोगों ने स्पष्ट कहा कि अब तो हम लोग भी भगवान के भरोसे हैं बस एक ही गाना गा रहे हैं घर में रहिए! लेकिन क्या इससे कुछ हो पाएगा? नागरिकों का यह भी कहना है कि होम क्वॉरेंटाइन की व्यवस्था पर अब रोक लगा देना चाहिए। इसके अलावा क्वॉरेंटाइन की व्यवस्था को उत्कृष्ट बनाना भी जिला प्रशासन की ही जिम्मेदारी है। क्योंकि घर में क्वॉरेंटाइन किया गया व्यक्ति मनमानी जरूर करता है। सभी ने माना है कि यही वजह है कि जिला प्रशासन के प्रारंभिक मेहनत युक्त प्रयासों के बावजूद भी बाराबंकी जनपद में कोरोना की बमबारी इतनी तेजी से हुई कि संक्रमित मरीजों की संख्या 1 सैकड़ा पार हो गई। यदि जनपद के जनप्रतिनिधियों की बात करें तो एक दो जनप्रतिनिधियों को छोड़कर ज्यादातर बस केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रहे हैं। यह जरूर है कि तमाम स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा जागरूक युवा लोगों ने इस महामारी के दौरान जनसेवा के लिए खूब काम किया है ।फिलहाल जब तक होम क्वॉरेंटाइन की व्यवस्था पर जिला प्रशासन अथवा सरकार दोबारा समीक्षा नहीं करेगी तब तक संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होना संभावित ही लग रहा है? यह संभावना तब और बलवती हो जाती है जब जनपद के जिम्मेदार अधिकारी किसी सूचना को दिए जाने अथवा किसी मुद्दे पर, वार्ता करने की स्थिति में अपना फोन ही नहीं उठाते? तब समझा जा सकता है कि कोरोना के लिए बाराबंकी मुफीद क्यों बन पड़ा है?

 

बाराबंकी। फिलहाल कोरोना के खौफ के बीच आज एक सुखद अथवा अच्छी खबर भी जिले के लोगों को मिली ।जी हां जिलाधिकारी बाराबंकी ने यह सूचना दी कि कोरोना संक्रमित पाए गए मरीजों में से हैदरगढ़ के दो पॉजिटिव मरीज पूरी तरह से उपचारित हो चुके हैं। इस अच्छी खबर ने व्यापक अंधेरे में एक हल्का सा प्रकाश जरूर दिखाया है। जाहिर है कि दो संक्रमित मरीजों के उपचारित होने के बाद अब जनपद में ऐसे मरीजों की संख्या एक सौ 28 रह गई है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

(नोट : उपरोक्त लेख लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं )

Review बाराबंकी में कोरोना बम के लिए वरदान बना होम क्वॉरेंटाइन ? (सम्पादकीय).

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