भाजपा विधायकों ने स्थायी समितियों से दिया इस्तीफा

स्पीकर विमान बनर्जी के मुकुल रॉय को लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष के रूप में नामित करने के फैसले के विरोध में पश्चिम बंगाल में भाजपा विधायकों ने विधानसभा की सभी आठ स्थायी समितियों से इस्तीफा दे दिया।

बाद में भाजपा विधायक दल के सदस्यों ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की।

पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा में कुल मिलाकर आठ स्थायी समितियां हैं और आमतौर पर विपक्षी विधायकों को उन समितियों का अध्यक्ष बनाया जाता है। मंगलवार को इन समितियों के मनोनीत अध्यक्ष भाजपा के सभी आठ विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया। पत्र में कहा गया है कि पार्टी के निर्देश के बाद विधायक स्थायी समितियों से इस्तीफा दे रहे हैं।

इन आठ विधायकों में मिहिर गोस्वामी (चेयरमैन एस्टिमेट), मोनोज तिग्गा (चेयरमैन लेबर), कृष्णा कल्याणी (चेयरमैन पावर और गैर-पारंपरिक ऊर्जा), निखिल रंजन डे (चेयरमैन मत्स्य पालन), बिष्णु प्रसाद शर्मा (चेयरमैन पीडब्ल्यू और पीएचई), दीपक बर्मन (चेयरमैन सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा), अशोक कीर्तनिया (चेयरमैन अधीनस्थ विधानमंडल) और आनंदमय बर्मन (चेयरमैन पेपर्स लेड ऑन द टेबल) शामिल हैं।

अपना इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया से बात करते हुए तिग्गा ने कहा, यह सच है कि कोई नियम नहीं है, लेकिन यह प्रथा रही है कि अध्यक्ष विपक्ष द्वारा प्रस्तावित नाम की अनुमति देगा और उन्हें पीएसी का अध्यक्ष बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा, लेकिन इस राज्य में कुछ भी ठीक से नहीं होता है। मुकुल रॉय, जिन्हें हमारी पार्टी ने खारिज कर दिया है, को पीएसी का अध्यक्ष बनाया गया है। हमने विरोध किया, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। स्थायी समितियों का अध्यक्ष बनना बेकार है और इसलिए हमने इस्तीफा देने का फैसला किया। उन्होंने हमारी पीठ में छूरा घोंपा है।

भाजपा ने पीएसी के अध्यक्ष के रूप में अशोक लाहिड़ी के नाम का प्रस्ताव रखा था और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने मुकुल रॉय के नाम का प्रस्ताव रखा था। स्पीकर विमान बनर्जी ने आखिरकार रॉय को पीएसी के अध्यक्ष के रूप में नामित किया। यह मामला एक बड़े विवाद में तब्दील हो गया है। हालांकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि निर्णय अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में है और इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है, वहीं भाजपा ने आरोप लगाया कि यह निर्णय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से प्रभावित है।

इस बारे में पूछे जाने पर, तृणमूल कांग्रेस के नेता तापस रॉय ने कहा, वे इस्तीफा देंगे या नहीं, यह सब उन पर निर्भर है और मुझे इसके बारे में कुछ नहीं कहना है, लेकिन भाजपा नेताओं को पहले विधानसभा की कार्यवाही सीखनी चाहिए। निर्णय पूरी तरह से अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में है। इसलिए अगर वह रॉय को चेयरमैन बनाने का फैसला करते हैं तो हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही भाजपा को पीछे से छुरा घोंपने की बात नहीं करनी चाहिए। वे पूरे देश में इस तरह की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। उन्हें ऐसा कहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

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