मगही झारखंड राज्य के आठ जिले की जन भाषा है- प्रगतिशील मगही समाज

NH DESK, JHARKHAND
झारखंड के मुख्यमंत्री का बयान कि मगही झारखंड से बाहर की भाषा है, झारखंड की भाषा नहीं है, दुर्भाग्य पूर्ण है। मगही झारखंड राज्य के आठ जिले—– हजारीबाग, गिरीडीह,चतरा, कोडरमा, पलामू, हजारीबाग, रामगढ़ और देवघर आदि में जन भाषा के रुप में बोली जाती है। इतने बड़े भू भाग की जन भाषा मगही के प्रति एक जिम्मेदार और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह का बयान देना करोड़ों मगही भाषी लोगों का अपमान तो है ही,इनकी अस्मिता के साथ खिलवाड़ भी है।
झारखंड के मुख्यमंत्री का इस तरह का वयान झारखंड के नगपुरिया जन गोष्ठी (समाज) को केन्द्र कर दिया गया है। जिसमें रांची, गुमला, लोहरदगा, लातेहार,खूंटी, रामगढ़, सिमडेगा आदि जिले का भू भाग ही आता है। झारखंड का आन्दोलन जो अलग राज्य के लिए चलाया गया था, वह मूल रूप से इन्हीं जिलों के लोगों की भावना और यहां के संसाधनों का बाहरी लोगों द्वारा किए जा रहे वेशुमार दोहन और शोषण को केन्द्र कर चलाया गया था, और इन्हीं सब जिला को मिलाकर अलग नागपुरी राज्य या स्वतंत्र नागपुरी समाजिक आर्थिक इकाई का गठन होना चाहिए था। लेकिन ऐसा न कर मगही वहुल उक्त जिलों को भी बिहार से काटकर झारखंड में शामिल कर लिया गया ,जो नहीं होना चाहिए था। इन्हीं कारणों से मगही भाषी लोंगो द्वारा जो मगही भाषा बहुल क्षेत्र को बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ तीन राज्यों में बांट दिया गया हैं,इसे एक साथ मिलाकर एक स्वतंत्र समाजिक आर्थिक इकाई का दर्जा या नहीं तो अलग मगध राज्य की मांग किया जा रहा है । ताकि मगध की अपनी पहचान बची रह सके तथा अपने ही संसाधनों से पूर्ण आत्मनिर्भर बना जा सके।
इसलिए प्रगतिशील मगही समाज झारखंड सरकार से अनुरोध करती है कि मगही भाषा को उपेक्षित न कर इसे सम्मान दे, तथा केन्द्र सरकार से मगही भाषा को संविधान की अष्ठम सूची में शामिल करने की सिफारिश करे । अन्यथा मगही भाषी लोग इसके लिए आन्दोलन करने को बाध्य होंगे।

सुशील रंजन

Review मगही झारखंड राज्य के आठ जिले की जन भाषा है- प्रगतिशील मगही समाज.

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