विश्वनाथ प्रताप सिंह की कुछ चुनिंदा कविताएं

देश के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह अपने छोटे से कार्यकाल में लिए गए एक बड़े ही अहम और परिवर्तनशील फैसले की वजह से आजीवन विवादों में बने रहें। उनके मृत्यु के बाद भी राजनीतिक बहसों में यदा-कदा उनकी राजनैतिक तौर तरीकों, फैसलों और मुख्यधारा की राजनीति में आने से पहले की छात्र जीवन के राजनीतिक सफर पर बहुत कुछ बातें होती रहती हैं।

इस बीच वी पी सिंह किसी के लिए एक मसीहा हैं, जिसने उन्हें इस देश में बराबरी का अधिकार दिया। तो किसी के लिए बीपी सिंह एक खलनायक हैं, जिसने उनकी हक मारी की। इतिहास के किसी कालखंड में वह कांग्रेस के और इंदिरा के सबसे चहेते के युवा नेताओं में से एक हैं। तो बदले समय के साथ राजीव के बागी मंत्री।

इन सबसे इतर वी पी सिंह एक कवि भी हैं।आइए उनकी जयंती पर उनकी लिखी कविताओं में से पांच कविताएं पढ़ते हैं :

1. मुफ़लिस

मुफ़लिस से
अब चोर बन रहा हूँ मैं
पर
इस भरे बाज़ार से
चुराऊँ क्या
यहाँ वही चीजें सजी हैं
जिन्हे लुटाकर
मैं मुफ़लिस बन चुका हूँ।

 

2. लिफाफा 

पैगाम तुम्हारा
और पता उनका
दोनों के बीच
फाड़ा मैं ही जाऊँगा।

 

3. झाड़न

पड़ा रहने दो मुझे
झटको मत
धूल बटोर रखी है
वह भी उड़ जाएगी।

 

4. मैं और वक्त

मैं और वक्त
काफिले के आगे-आगे चले
चौराहे पर …
मैं एक ओर मुड़ा
बाकी वक्त के साथ चले गये।

5. मैं दुश्मन की छाया से लड़ रहा था*

कैसे भी वार करूँ
उसका सर धड़ से अलग नहीं
होता था

धरती खोद डाली
पर वह दफ़न नहीं होता था
उसके पास जाऊँ
तो मेरे ही ऊपर सवार हो जाता था
खिसिया कर दाँत काटूँ
तो मुँह मिट्टी से भर जाता था
उसके शरीर में लहू नहीं था
वार करते-करते मैं हाँफने लगा
पर उसने उफ़्फ़ नहीं की

तभी एकाएक पीछे से
एक अट्ठहास हुआ
मुड़ कर देखा, तब पता चला
कि अब तक मैं
अपने दुश्मन से नहीं,
उसकी छाया से लड़ रहा था
वह दुश्मन, जिसे अभी तक
मैंने अपना दोस्त मान रखा था।

मैं अपने दोस्त का सर काटूँ
या उसकी छाया को
दियासलाई से जला दूँ।

(* यह कविता उस समय की है जब वीपी सिंह कांग्रेस के भीतर ही रह कर कांग्रेस में लड़ रहे थे।)

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रोहन कुमार मिश्र
Yashaswi Yashawant

यशस्वी यसवंत एक जानकार और विचारशील विश्लेषक है।
ईश्वर का आभार कि मुझे उन्होंने ऐसे व्यक्ति से मिलाया👏👏😊

2 months ago

Review विश्वनाथ प्रताप सिंह की कुछ चुनिंदा कविताएं.

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