सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम:कहानी(सोशल मीडिया)

सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम ,कहानी सोशल मीडिया से

राम गोपाल सिंह एक सेवानिवृत अध्यापक हैं |

सुबह दस बजे तक ये एकदम स्वस्थ प्रतीत हो रहे थे |
शाम के सात बजते- बजते तेज बुखार के साथ-साथ वे सारे लक्षण दिखायी देने लगे, जो एक कोरोना पॉजीटिव मरीज के अंदर दिखाई देते हैं ||

परिवार के सदस्यों के चेहरों पर खौफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था |

उनकी चारपाई घर के एक पुराने बड़े से बाहरी कमरे में डाल दी गयी, जिसमें इनके पालतू कुत्ते “मार्शल” का बसेरा है |

राम गोपाल जी कुछ साल पहले एक छोटा सा घायल पिल्ला सड़क से उठाकर लाये थे और अपने बच्चे की तरह पालकर इसको नाम दिया “मार्शल” |

इस कमरे में अब राम गोपाल जी, उनकी चारपाई और उनका प्यारा मार्शल हैं |
दोनों बेटों -बहुओं ने दूरी बना ली और बच्चों को भी पास ना जानें के निर्देश दे दिए गये |

सरकार द्वारा जारी किये गये नंबर पर फोन कर के सूचना दे दी गयी ” |

खबर मुहल्ले भर में फैल चुकी थी, लेकिन मिलने कोई नहीं आया |

साड़ी के पल्ले से मुँह लपेटे हुए, हाथ में छड़ी लिये पड़ोस की कोई एक बूढी अम्मा आई और राम गोपाल जी की पत्नी से बोली ~
“अरे कोई इसके पास दूर से खाना भी सरका दो, वे अस्पताल वाले तो इसे भूखे को ही ले जाएँगे उठा के” |

अब प्रश्न ये था कि उनको खाना देनें के लिये कौन जाए?

बहुओं ने खाना अपनी सास को पकड़ा दिया |

अब राम गोपाल जी की पत्नी के हाथ, थाली पकड़ते ही काँपने लगे, पैर मानो खूँटे से बाँध दिये गए हों |

इतना देखकर वह पड़ोसन बूढ़ी अम्मा बोली~
“अरी तेरा तो पति है, तू भी……..||
मुँह बाँध के चली जा और दूर से थाली सरका दे, वो अपने आप उठाकर खा लेगा” |

सारा वार्तालाप राम गोपाल जी चुपचाप सुन रहे थे, उनकी आँखें नम थी और काँपते होठों से उन्होंने कहा कि~
“कोई मेरे पास ना आये तो बेहतर है, मुझे भूख भी नहीं है” |

इसी बीच एम्बुलेंस आ जाती है और राम गोपाल जी को एम्बुलेंस में बैठने के लिये बोला जाता है |

राम गोपाल जी घर के दरवाजे पर आकर एक बार पलटकर अपने घर की तरफ देखते हैं |

पोती-पोते प्रथम तल की खिड़की से मास्क लगाए दादा को निहारते हुए और उन बच्चों के पीछे सर पर पल्लू रखे उनकी दोनों बहुएँ दिखाई पड़ती हैं |

घर के दरवाजे से हटकर बरामदे पर, दोनों बेटे काफी दूर अपनी माँ के साथ खड़े थे |
विचारों का तूफान राम गोपाल जी के अंदर उमड़ रहा था |
उनकी पोती ने उनकी तरफ हाथ हिलाते हुए टाटा एवं बाई बाई कहा |

एक क्षण को उन्हें लगा कि ‘जिंदगी ने अलविदा कह दिया’ |

राम गोपाल जी की आँखें लबलबा उठी |

उन्होंने बैठकर अपने घर की देहरी को चूमा और एम्बुलेंस में जाकर बैठ गये |

उनकी पत्नी ने तुरंत पानी से भरी बाल्टी घर की उस देहरी पर उलेड दी, जिसको राम गोपाल चूमकर एम्बुलेंस में बैठे थे |

इसे तिरस्कार कहो या मजबूरी, लेकिन ये दृश्य देखकर कुत्ता भी रो पड़ा और उसी एम्बुलेंस के पीछे- पीछे हो लिया, जो राम गोपाल जी को अस्पताल लेकर जा रही थी |

राम गोपाल जी अस्पताल में 14 दिनों के अब्ज़र्वेशन पीरियड में रहे |

उनकी सभी जाँच सामान्य थी |
उन्हें पूर्णतः स्वस्थ घोषित करके छुट्टी दे दी गयी |

जब वह अस्पताल से बाहर निकले तो उनको अस्पताल के गेट पर उनका कुत्ता मार्शल बैठा दिखाई दिया |

दोनों एक दूसरे से लिपट गये |
एक की आँखों से गंगा तो एक की आँखों से यमुना बहे जा रही थी |

जब तक उनके बेटों की लम्बी गाड़ी उन्हें लेने पहुँचती, तब तक वो अपने कुत्ते को लेकर किसी दूसरी दिशा की ओर निकल चुके थे |

उसके बाद वो कभी दिखाई नहीं दिये |

आज उनके फोटो के साथ उनकी गुमशुदगी की खबर छपी है |

अखबार में लिखा है कि सूचना देने वाले को 40 हजार का ईनाम दिया जायेगा |

40 हजार – हाँ पढ़कर ध्यान आया कि इतनी ही तो मासिक पेंशन आती थी उनकी, जिसको वो परिवार के ऊपर हँसते गाते उड़ा दिया करते थे ||

एक बार रामगोपाल जी के जगह पर स्वयं को खड़ा करो |
कल्पना करो कि इस कहानी में किरदार आप हो |
आपका सारा अहंकार और सब मोहमाया खत्म हो जाएगा |

जीवन में कुछ नहीं है, कोई अपना नहीं है |
जब तक स्वार्थ है, तभी तक आपके सब हैं |

जीवन एक सफ़र है, मौत उसकी मंजिल है ||

Kuldeep kumar singh
Navodayans Heights

सब पैसा कमाना व्यर्थ है।
अब सब काम बंद।
सिर्फ कंदमूल फल खाना है,जंगल मे राहनाहै।

7 months ago

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