हिंदी दिवस के अवसर पर गिरिडीह जिला के शिक्षक द्वारा हिंदी पर चर्चा

संवाददाता- पवन कुमार वर्मा

अभी के समय में हमारी मातृभाषा हिंदी एक तरफ से विलुप्त होते जा रही है जहां बहुत सारे व्यक्ति हिंदी भाषा का उपयोग करने में लज्जा महसूस करते हैं तो हिंदी का विलुप्त होना पर ही है
इसी विषय पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं हमारे गिरिडीह जिले के हिंदी भाषा के शिक्षक श्री अविनाश जी
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उनसे हमारी कुछ प्रश्न एवं उत्तर

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प्रश्न हमारे देश भारत में हिंदी भाषा का महत्व हमेशा कम होता जा रहा है क्यों.
उत्तर– आजकल लोग अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाने पर ज्यादा जोर देते हैं पहले हमारे पूर्वज बच्चों को अपने साथ सुलाते थे तो हिंदी और संस्कृत के श्लोक सिखाया करते थे लेकिन आज ए फॉर एप्पल बी फॉर बॉल सी फॉर कैट इत्यादि का ज्ञान देते हैं यही कारण है की हिंदी का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है
प्रश्न–,,, आप हिंदी के विकास के लिए क्या कदम उठा रहे हैं
, उत्तर–, ,, मैं स्वयं शुद्ध हिंदी में वार्तालाप करता हूं यह अलग बात है कि हमारे वाहन में नंबर हिंदी में लिखा हुआ था जिसके वजह से चलान,,,,, तक काट दिया गया और मैंने हिंदी में नंबर लिखने का जुर्माना सरकार को दिया है फिर भी मैं हिंदी का पक्षधर हूं और अपने आप हिंदी में शुद्ध हिंदी का उच्चारण करते हुए हमेशा सब से वार्तालाप करूंगा हला के लोग मुझे है दृष्टि से देखते हैं फिर भी मुझे उसकी कोई परवाह नहीं

हिंदी की गौरव गाथा
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जननी की ममता है हिंदी l
बापू की भाषा है हिंदी l
हिंदुस्तान के गाथा है हिंदी l
अहंकार को मिटाता है हिंदी l
समता को सिखाता है हिंदी l
विषमता को मिटाता है हिंदी l
राष्ट्रगान को दिखाता है हिंदी l
स्वाभिमान को बढ़ाता है l
जगत की चौथी बड़ी भाषा है हिंदी l
आया समय अब राष्ट्रभाषा बनाओ हिंदी l
इसके ना हो कहीं उपेक्षा l
हिंदुस्तानी से है मेरी यही अपेक्षा l

झारखंड के गिरिडीह जिले से पवन कुमार वर्मा की यह रिपोर्ट

Review हिंदी दिवस के अवसर पर गिरिडीह जिला के शिक्षक द्वारा हिंदी पर चर्चा.

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