167 सालों की एक लंबी और शानदार सेवा के बाद, पहली बार राष्ट्र की सुरक्षा के लिए संचालन रुका : रेलवे दिवस विशेष

-Yashashwi Yashwant,NH Desk
रेलवे सिर्फ भारत सरकार का उपक्रम या संपत्ति मात्र नहीं है। यह भारतीय जनमानस के दैनिक जीवन के गतिशीलता का एक अहम हिस्सा भी है। छुकछुक करती रेल न जाने हर रोज कितनों के आशाओं को गति देती है तो वहीं दूसरी तरफ परदेस के हवा से बौराए लोगों के घर पहुंचने का साधन बनती है। अपनी इस लंबी यात्रा में वह कई पड़ावों पर रुकती है लेकिन क्षणभर के लिए। फिर चल देती है किसी अगले पड़ाव के लिए।
1853 में पहली बार भारत में रेलगाड़ी ने पटरियों को अपने छुकछुक करते पहियों से गुलजार किया। तब से अब तक 167 सालों की लंबी दूरी को भारतीय रेलवे ने बिना किसी रुकावट के तय किया। बीच बीच में कभी कभी ब्रेक लगे ट्रेन रुकी परंतु ऐसे नहीं जैसे जिंदगी थम गई हो। अपने इस लंबे इतिहास में कभी भी रेलवे दिवस पर ट्रेनों का परिचालन ठप नहीं रहा। आंधी हो, तुफान हो, बाढ़ हो, विकट से विकट महामारी हो रेलवे एक साथ कभी पूरे देश में अपनी सेवाओं को बंद नहीं किया। कुछेक हड़तालोंके दौरान ट्रेन परिचालन ठप जरुर रहा लेकिन शीघ्र ही रेलवे कर्मचारी काम पर वापस भी आए।
इतिहास में यह पहला मौका है जब रेल दिवस पर पूरे भारत में ट्रेन परिचालन ठप है। केन्द्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीटर पर लिखा :– 1853 से राष्ट्र की सेवा में : 167 साल पहले, पहली पैसेंजर ट्रेन को मुंबई से ठाणे के लिए रवाना किया गया था।  एक लंबी और शानदार सेवा के बाद, पहली बार राष्ट्र की सुरक्षा के लिए संचालन रुका हुआ है।  मैं महामारी के बीच लोगों को सहयोग करने के लिए धन्यवाद देता हूं।  हम विजयी होकर उभरेंगे।
वहीं रेलवे मंत्रालय के ट्विटर समेत कई मंडलों के मुख्यालय ने रेलवे दिवस की शुभकामनाएं दीं है।
आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण के महामारी को देखते हुए गत 22 मार्च से पूरे देश में रेलवे की यात्री सेवाएं स्थगित। माना जा रहा था कि 14 अप्रैल के बाद ट्रेनों संचालन होने लगेगा। परंतु माननीय प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद 19 और दिनों के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। ऐसे में रेल सेवाएं तीन मई तक स्थगित हैं। जिसके कारण पहली बार रेलवे दिवस पर ट्रेनों का परिचालन बंद है।

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