8 साल बाद फिर से आबू कि शान राजभवन की शुरुआत

मई-जून के दिन और गर्मी… सुनकर ही ऊफ निकल जाती है। ज्येष्ठ माह के इन दिनों में जब प्रदेश 49 डिग्री सेल्सियस के करीब भट्‌टी की तरह तप रहा होता है तब इकलौता माउंटआबू ही है, जो कूल-कूल बना रहता है। यही खासियत इसे राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन बनाती है और राजभवन भी यहां शिफ्ट हो जाता है। इन दिनों दिन का पारा 38 और रात का 22 डिग्री से ऊपर नहीं जा पाता। सर्दियों में तो बीती 1 जनवरी को रिकॉर्ड -4.4 तक लुढ़क गया था। इन दिनों रात का पारा 15-16 से ऊपर नहीं जा पाता। मई-जून में जब माउंटआबू में दिन का पारा 37-38 होता तब यहां से 411 किलोमीटर दूर जोधपुर जिले का फलौदी 49 डिग्री पर धधक रहा होता है। आखिर क्या कारण हैं, जो हिल स्टेशन बनाते हैं। बता रहे हैं प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानी राधेश्याम शर्मा…
…तब 411 किमी दूर फलौदी 49 डिग्री पर तपता है
{ जोधपुर जिले के फलौदी क्षेत्र में मई-जून में दिन का पारा 49 और रात का 35-37 डिग्री पहुंच जाता है।
{ प्रदेश में फलौदी में सबसे कम 35% आद्रता रहती है, जबकि सर्वाधिक आद्रता 70-75% माउंट में ही है।
{ प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश 1670.9 mm वाला स्थान माउंट आबू में। हालांकि जिलास्तर पर झालावाड़ है। जबकि फलौदी सहित जैसलमेर का सम क्षेत्र सबसे शुष्क है।
{ प्रदेश का सबसे ऊंचा 1360 मीटर का पठार (उडिया) भी माउंटआबू में ही, जो गुरु शिखर से नीचे है।
{ माउंटआबू में 1220 मीटर की ऊंचाई पर रहती है आबादी?
8 साल बाद कल से माउंट आबू में 7 दिन चलेगा राजभवन
सिरोही/माउंट आबू | आठ साल बाद मंगलवार से माउंट आबू में सात दिन तक राजभवन चलेगा। ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए राज्यपाल कलराज मिश्र 22 से 29 जून तक यहां प्रवास करेंगे। इससे पहले 20 मई 2013 को तत्कालीन राज्यपाल मारग्रेट अल्वा 25 दिन के ग्रीष्मकालीन प्रवास पर आई थीं। पिछले 8 साल तक किसी भी राज्यपाल ने माउंट आबू में ग्रीष्मकालीन प्रवास नहीं किया। हालांकि, तत्कालीन राज्यपाल कल्याण सिंह 26 व 27 जून 2015 में दो दिन के अल्पप्रवास पर आए थे। राज्यपाल कलराज मिश्र 22 जून को दोपहर 2 बजे मानपुर हवाई पट्टी पर विमान से आएंगे। इसके बाद सड़क मार्ग से माउंटआबू पहुंचेंगे। माउंट आबू में एक सप्ताह का प्रवास रहेगा। 9 सितंबर 2019 में कार्यभार ग्रहण करने के करीब 2 साल बाद राज्यपाल कलराज मिश्र पत्नी सत्यवती मिश्र के साथ पहली बार माउंट आबू आएंगे। राज्यपाल के प्रिंसिपल ओएसडी गोविंदराम जायसवाल का कहना है कि कोरोना महामारी के चलते राज्यपाल मिश्र लंबे समय से माउंट आबू स्थित
पहाड़ की प्रकृति
सपाट धरती की बजाय पहाड़ खासकर चोटियों की वजह से सूरज की किरणंे एक साथ पूरी सतह काे गर्मी नहीं दे पाती है। ऊंचाई हवा की गति ज्यादा होती है। इससे भी तापमान कम रहता है।
राहत की दीवार
पश्चिमी राजस्थान से आने वाली गर्म हवा इतनी ऊंचाई पर नहीं जा पाती है। भीषण गर्मी का असर यहां गौण हो जाता है। आम दिनों में मौसमी बदलाव से अंधड़, बारिश होने से तापमान गिर जाता है।
गर्मी की रात में 22, सर्दी में -4.4 रहता है पारा
तभी तो गर्मियों में राज्यपाल करते हैं प्रवास, राजभवन भी यहीं से चलता है
से 36 डिग्री के बीच रहता है मई-जून के दिनों में पारा
34
मीटर तक की ऊंचाई गर्मी नहीं बढ़ने देती
1722
रिकॉर्ड ऊंचाई
सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर की समुद्र तल से ऊंचाई 1722 मीटर है। जो इलाका जितना ऊंचा होगा, वह उतना ही ठंडा होगा। मोटे तौर पर कह सकते हैं कि प्रति किमी ऊंचाई पर 6 से 7 डिग्री तापमान कम हो जाता है।
मई-जून में जब प्रदेश 49 डिग्री तप रहा होता है, यहां 35 डिग्री रहता है तापमान
राजभवन में निवास नहीं कर पा रहे थे। इसलिए अब माउंट आबू आएंगे। माउंट आबू राजभवन में राज्यपाल के साथ प्रिंसिपल ओएसडी गोविंदराम जायसवाल, सचिव सुबीर कुमार, पीएस विवेक शुक्ला, आईपीएस हर्षवर्धन और अटेंडेंट मूलचंद मीणा सहित पूरा लवाजमा होगा। माउंट आबू में राजभवन 1866 में बना था। उस समय अंग्रेज अधिकारी यहां ग्रीष्मावकाश के लिए आते थे। राजभवन ऊंची वादियों के बीच घने पेड़ों से घिरा है। पूरा परिसर 8.54 हेक्टेयर भूमि पर बना हुआ है। राजभवन में 7 बेडरूम हैं। दो सिटिंग रूम है। एक बड़ा डायनिंग हॉल है, जिसमें एक साथ 24 लोग बैठ सकते हैं। एक छोटा डाइनिंग हॉल हैं, जिसमें 5 लोग बैठ सकते हैं। भवन में 7 बाथरूम है। स्टाफ क्वार्टर और सुरक्षा के लिए 150 लोगो के रुकने की भी व्यवस्था है।

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