चाँद की परिधि नाप रहे नवोदयन्स , मिशन चंद्रयान -2

-Yashwant Kumar,NH Desk

कौन कहता है कि क्षितिज की लम्बाई नहीं मापी जा सकती। हौसला हो तो इंसान चांद पर भी जा कता है। यह महज एक जुमला नहीं है, हकीकत है। कहानी है उन होनहारों की जो मिट्टी से उठकर चांद पर मिट्टी तलाशने में लगे है। मिशन चंद्रयान-2 के लिए काम रही टीम के हिस्सा रहे दो नवोदयन्स की। अक्सर मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे पढ़ लिखकर कोई नौकरी कर लें। जहां तक संभव है हो सिविल सेवक बनकर घर के रूतबे को बढ़ाये। ऐसी बातों को मिथक कहा जाता है और मिथकों का टुटना समाज के गतिशीलता को दर्शाता है। ऐसे ही कुछ मिथकों को तोड़ने का काम किया है नवोदन राजीव सिंह और रविकांत ने।


        आप जब छोटे शहरों से हो तो आपके लिए सपनों को सच करना ही सिर्फ मुश्किल नहीं होता है, देखना भी मुश्किल जैसा ही होता है। फिर कुछ लोग होते है जिनके लिए सारी बातें सिर्फ बातें होती है। अगर कुछ हकीकत होता है तो सपनों को सच करना। रविकांत और राजीव सिंह ने भी वही किया।

गिरिडीह के एक छोटे-से गांव बेंगाबाद में जन्में रविकांत के पिता टेलर थे। अपनी छोटी आमदनी से वे घर चलाते थे। ऐसे में रविकांत के लिए किसी कान्वेंट स्कूल में पढ़ना महज एक सपना था। होनहार और जुनूनी विद्यार्थी रविकांत ने जेएनवी का इंट्रेंस दिया, उत्तीर्ण हुए और फिर शुरू हुआ एक नया जीवन। जहां ज्ञान मिला, उड़ने के लिए पंख मिला और सपनों को सच करने का का विश्वास भी। जवाहर नवोदय विद्यालय, गिरीडीह से अपनी पढा़ई पूरी करने के बाद रविकांत आईआईटी के इंट्रेंस में उत्तीर्ण हुए। फिर आईआईटी खड़गपुर से बी.टेक किया, एम.टेक किया। 2016 में उनका कैंपस सेलेक्शन इसरो के लिए हो गया। यही से शुरु हुआ एक नया सफर जो लूनर मिशन चंद्रयान2 के टीम में शामिल होने का सफर है।


               वहीं दूसरा नाम राजीव सिंह का है। राजीव ने जेएनवी कोचर से अपनी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा पाई। फिर असम इंजीनियरिंग कॉलेज से केमिकल इंजीनियरिंग की पढा़ई पूरी की। इसके बाद उन्होंने भारत की एकमात्र और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जिंक कारखाना हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में नौकरी पाई। राजीव यहीं नहीं रूके, उन्होने और निरंतर आगे बढ़ने को प्रयासरत रहे। परिणामस्वरूप 2009 में उन्होनें बतौर वैज्ञानिक इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा में नौकरी पा ली। यह महथ एक शुरूआत था। इसरो के कई छोटे बड़े प्रोजेक्ट पर काम करते हुए वे इस मुकाम तक पहुंचे जब उन्हे भारत के बहुप्रतीक्षित मिशन के टीम के लिए चयनित किया गया। 


       राजीव सिंह और रविकांत इसरो के उस टीम के हिस्सा थे, जिस पर आज पूरा देश नाज कर रहा है. जिसके कारनामे के आगे दुनिया अवाक् है, “नवोदयन्स हाईट्स ” परिवार मिशन चन्द्रयान-2 से जुड़े सभी लोगों को मुबारकबाद देता है। नवोदय विद्यालय परिवार के इन दो सदस्यों रविकांत और राजीव सिंह को भी शुभकामनाएं।

One thought on “चाँद की परिधि नाप रहे नवोदयन्स , मिशन चंद्रयान -2

  1. दो ‘नवोदयन्स’ की प्रेरक उपलब्धि! आपने बहुत सुंदर लिखा है। आगे भी और अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगी, ऐसी अपेक्षा है। साधुवाद एवं सद्भावनाएं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *