खेत की तारबंदी के लिए सरकार दे रही 50 फ़ीसदी का अनुदान

जयपुर, 5 मार्च। वन राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि जंगली जानवारों से फसलों को बचाने के लिए किसानों को तारबंदी के लिए अनुदान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए किसानों को कृषि विभाग में आवेदन करना होता है। उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए तारबंदी हेतु 50 प्रतिशत तक अनुदान देय है।
विश्नोई प्रश्नकाल में विधायकों की ओर से इस सम्बन्ध में पूछे गये पूरक प्रश्नों के जवाब में बताया कि जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा 33 जिलों में 6 करोड़ 48 लाख रुपये के आवंटन का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि 6 लाख 48 हजार मीटर तारबंदी करने के विरूद्ध 3 लाख 72 हजार की तारबंदी की गयी थी। उदयपुर जिले में वर्ष 2020-21 में लक्ष्यों के विरुद्ध 3 हजार 454 मीटर में तारबंदी की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। उन्होंने बताया कि उदयपुर में अभी तारबंदी को लेकर कोई आवेदन लंबित नहीं है।
इससे पहले विधायक श्री फूल सिंह मीणा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र उदयपुर ग्रामीण में किसानों की खेती को जंगली जानवरों द्वारा नष्ट करने के संबंध में कोई प्रकरण विभाग को प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि किसानों की फसलों को रोजड़ों एवं जंगली सूअरों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 4(1) एवं 5(2) के तहत जारी अधिसूचना 3 मार्च 1994 एवं 19 जनवरी 1996 तथा 30 अप्रेल 1997 और  31 अगस्त 2000 एवं राज्य सरकार के पत्र 31 मार्च 1998 द्वारा प्रावधान किया गया है।
वन राज्य मंत्री ने बताया कि कृषि विभाग से प्राप्त सूचनानुसार प्रदेश में किसानों की फसलों को नीलगाय (रोजड़ों) व आवारा पशुओं से बचाने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तिलहन (एन.एफ.एस.एम. ऑयल सीड्स) अंतर्गत सभी श्रेणी के कृषकों को लक्षित कर सामुदायिक आधार पर कांटेदार चैन लिंक तारबंदी कार्यक्रम लिया जा रहा है। इसमें कृषकों को लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि 40 हजार रूपये, जो भी कम हो प्रति षक 400 रनिंग मीटर तक अनुदान देय है।

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