आज के दिन ही राखी गई थी लाल किले कि नीव

(भाषा) हर वक्त दौड़ती भागती दिल्ली के बीचों-बीच लाल बलुआ पत्थर से बनी एक खूबसूरत इमारत के सामने से गुजरें तो पल भर को नजर ठहर जाती हैं। पांचवे मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा तामीर कराए गए इस ऐतिहासिक लाल किले को वर्ष 2007 में युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में चुना। शानदार गुंबदों, बेहतरीन मेहराबों और जालीदार छज्जों से सजी यह इमारत, बेहतरीन स्थापत्य कला और बेमिसाल कारीगरी का नमूना है। देश के इतिहास में इसके महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आजादी के बाद से हर वर्ष 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से देश के प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं। इतिहास के पन्नों को पलटें तो मालूम पड़ता है कि लाल किले की नींव 1639 में 29 अप्रैल के दिन ही रखी गई थी।

इस दिन का विश्व की ऐतिहासिक इमारतों में शुमार बकिंघम पैलेस के लिए भी खास महत्व है। दरअसल 1993 में आज ही के दिन ब्रिटिश राजशाही के इस आवास को आम जनता के लिए खोल दिया गया था। इससे पहले तक साल के कुछ ही दिनों में इसे आम जनता के लिए खोला जाता था, लेकिन अब लोग पूरे साल टिकट खरीदकर इस शाही इमारत के कुछ हिस्से का दीदार कर सकते हैं।

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