साहित्यकार अपनी बौद्धिक क्षमता से लेखनी के द्वारा समाज को निखारने-संवारने हेतु सृजन करता है: पीएल पुनिया

बाराबंकी। साहित्यकार अपनी बौद्धिक क्षमता से लेखनी के द्वारा समाज को निखारने-संवारने हेतु सृजन करता है, इस रूप में साहित्यकार तपस्वी होता है और समाज को ऋणी बनता है।
उक्त विचार मुख्य अतिथि डॉ. पीएल पुनिया, पूर्व सांसद, बाराबंकी / प्रभारी छत्तीसगढ़ ने पूर्वज साहित्यकार- जन्मभूमि दर्शन यात्रा के आठवें चरण (पूरक यात्रा) को मोहल्ला ओबरी स्थित अपने आवास से हरी झण्डी दिखाकर रवाना करते समय व्यक्त किए।
अवधी के पुरोधा डॉ. राम बहादुर मिश्र ने कहा कि बाराबंकी का साहित्य और समाज समन्वय वादी है जिसमें सतनामी संप्रदाय, सूफी संप्रदाय, कबीर संप्रदाय, सगुण-निर्गुण परम्परा का साहित्य बहुत ही समृद्ध है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अमित कुमार संयोजक/जिलाध्यक्ष, अटेवा (पेंशन बचाव मंच) बाराबंकी ने कहा कि बाराबंकी में जो साहित्यिक दस्तावेज तैयार किया जा रहा है वह युगों-युगों तक आने वाली पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने यात्रा दल के सदस्यों, योजनाकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सचमुच नई पीढ़ी का दायित्व पूरा कर रहे हैं यह लोग। यात्रा दल में यात्रा निर्देशक डॉ. विनयदास, यात्रा अध्यक्ष प्रदीप सारंग, समन्यवक डॉ. बलराम वर्मा, यात्रा संयोजक पंकज कँवल, सह संयोजक शिक्षण संस्थान प्रकोष्ठ भाजपा अवध क्षेत्र अंगद सिंह, अनिल श्रीवास्तव लल्लू, सचिव डॉ. कुमार पुष्पेंद्र, अनुपम वर्मा, रमेश चंद्र रावत आदि रहे। इस मौके पर अजय सिंह गुरु, डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित, एडवोकेट इकबाल रही, सदानंद वर्मा, अब्दुल खालिक, शशिप्रभा, किरण भारद्वाज, ऐश्वर्या भारद्वाज, तान्या भारद्वाज, साहब नारायण शर्मा आदि मौजूद थे।
यात्रा दल बाराबंकी से रवाना होकर दरियाबाद पहुंचा। यहां पर सर्वप्रथम यात्रा दल ने पूर्वज साहित्यकार राय राजेश्वर बली की साधनाभूमि पर पहुंच कर नमन किया। यहां मौजूद यशोवर्धन बली ने अपने बाबा पूर्वज साहित्यकार राय राजेश्वर बली के कृतित्व एवं व्यक्तित्व की जानकारी दी। इसके बाद यात्रा दल ने क्रमशः कासिमशाह, श्री राम अवस्थी गंवार, रविदत्त मिश्रा, शंकर दयाल अवस्थी ‘शंकर’ की साधनाभूमि पर पहुँच कर नमन किया। इसके साथ ही महेश दत्त ‘गिरीश’, बेनी माधव पाण्डेय, रामचरन पाण्डेय, देवी प्रसाद ‘रसदेव’, गंगा सहाय ‘चैन’ के साहित्य की खोजबीन भी की गई।

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