साहित्य को पढ़ने, इसके मर्म को समझने वाला व्यक्ति कभी जीवन में असफल नहीं होता

बाराबंकी। साहित्य को पढ़ने, इसके मर्म को समझने वाला व्यक्ति कभी जीवन में असफल नहीं होता है। व्यक्ति की उम्र सीमित होती है किंतु विचार और साहित्य की उम्र असीमित होती है।
उक्त विचार मुख्य अतिथि शशि श्रीवास्तव अध्यक्ष नगर पालिका परिषद नवाबगंज बाराबंकी ने पूर्वज साहित्यकार-जन्मभूमि दर्शन यात्रा के सातवें चरण का मंगलवार को नगर पालिका परिषद छाया चौराहा से शुभारम्भ करते हुए व्यक्त किये।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रंजीत बहादुर श्रीवास्तव पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका परिषद बाराबंकी ने कहा कि यह संसार नश्वर है साहित्य और विचारों के सहारे ही अमृत्व प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बाराबंकी के साहित्यकारों की जानकारियां एकत्रित कर दस्तावेज के रूप में समाज को समर्पित करने का संकल्प लेकर चलने वाले यात्रा दल की प्रशंसा भी की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अरूणेन्द्र कुमार वर्मा प्रांतीय मंत्री / जिलाध्यक्ष उ0प्र0 जूनियर हाईस्कूल (पूर्व मा0) शिक्षक संघ ने कहा कि बाराबंकी का साहित्य इतिहास बहुत ही समृद्ध है। यहां के रचनाकारों ने अपनी लेखनी से विश्व में विशिष्ट स्थान हासिल कर जनपद को गौरवान्वित किया है, जिनमें संत कवि बाबा बैजनाथ, संत चतुर्भुज दास, संत महावीर दास और पंडित महेश दत्त शुक्ल के नाम प्रमुख हैं।
शुभारम्भ कार्यक्रम में यात्रा अध्यक्ष प्रदीप सारंग, समन्वयक डॉ. बलराम वर्मा, यात्रा संयोजक पंकज कँवल, धीरेंद्र चौधरी, अनुपम वर्मा, सदानंद वर्मा, रजत बहादुर वर्मा, शशिप्रभा, रमेश चंद्र रावत शामिल रहे। शुभारम्भ मौके पर डॉ विनयदास, डॉ श्याम सुन्दर दीक्षित, अजय सिंह गुरुजी, एड इकबाल राही, डॉ. कुमार पुष्पेंद्र, एड सुषमा शर्मा, वेद प्रकाश शर्मा, अब्दुल खालिक, साहब नारायण शर्मा सुनील मौर्या आदि मौजूद रहे।
यात्रा दल सर्वप्रथम मोहल्ला सत्यप्रेमीनगर स्थित पूर्वज साहित्यकार त्रिभुवन नाथ शर्मा ‘मधु की साधनाभूमि पर पहुंचा। यहां श्रीश शर्मा जी द्वारा यात्रा दल का भावपूर्ण स्वागत किया गया। पूर्वज साहित्यकार को नमन करके यात्रा दल हेतमापुर के लिए रवाना हुआ। हेतमापुर से पहले बंधे के पास में हेतमापुर जाने वाली सड़क का कुछ हिस्सा बाढ़ में बह जाने के कारण आगे की यात्रा पैदल ही तय करनी पड़ी। लगभग एक किलोमीटर की यात्रा पैदल तय करके यात्रा दल हेतमापुर स्थित संत नारायण दास की साधनाभूमि पहुंचा। यहां पर पूर्वज साहित्यकार को नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद यात्रा दल ने क्रमशः रामनगर क्षेत्र स्थित बृजलाल भट्ट ‘बृजेश’, रामछत्र त्रिपाठी ‘द्विजछत्र’, यशवीर सिंह एवं दिकोलिया ग्राम स्थित राम नारायण वर्मा ‘वर्मेश’ की साधनाभूमि पर पहुँच कर नमन किया।

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