‘बाबा नाम केवलम्’ सिद्ध महामन्त्र का अखण्ड संकीर्त्तन

NH DESK-JHARKHAND

दिनांक 19.12. 2021 को ‘सेवा धर्म मिशन’ के पाॅंच दिवसीय ‘उपयोगिता प्रशिक्षण शिविर’ के समापन पर्व पर आयोजित अखण्ड कीर्त्तन व मिलित साधना के उपरान्त आचार्य गुणीन्द्रानन्द अवधूत ने प्रशिक्षणार्थियों को सम्बोधित करते हुये कहा कि आज पृथ्वी भीषण परिस्थितियों से गुजर रही है। प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिका महामारी, जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम के रूप में मौसम परिवर्तन, नाना प्रकार की बिमारियाॅं, तापमान वृद्धि आदि का सामना मनुष्य कर रहा है। पूॅंजीवादी मानसिकता तथा वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा में दुनिया के राजनीतिज्ञ अपने सामरिक शक्तियों को इस हद तक विकसित कर चुके हैं कि छोटी-सी अनबन में न्यूक्लियर हथियार के प्रयोग की धमकी देने लगते हैं। इस होड़ में वैश्विक अर्थ-व्यवस्था अव्यवस्थित हो चुकी है। सरकार की नीतियाॅं लोकलुभावन ज्यादा हैं, जनोपयोगी कम। सामान्य जनता आर्थिक अनिश्चितता में जी रही है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में मानव अस्तित्व की रक्षा के सारे प्रयास अधूरे साबित हो रहे हैं क्योंकि उसके पीछे शुद्ध ईश्वरीय भाव का अभाव है।

उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य ईश्वर की प्रार्थना-भक्ति तो करता है लेकिन डर और भौतिकवादी मानसिकता से, जबकि ईश्वर प्रेम के वशीभूत हैं। मनुष्य को परमात्मा की भक्ति नि:स्वार्थ भाव से करनी चाहिये। इसमें कीर्त्तन का बहुत बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि ‘बाबा नाम केवलम्’ अष्टाक्षरी सिद्ध महामन्त्र है। इसका संकीर्त्तन करने से मन के सभी क्लेश और विपाक नष्ट हो जाते हैं।

आपदा-विपदाओं का पारावार से मनुष्य निजात पायेगा। आचार्य अवधूत ने कहा कि सेवा धर्म मिशन के तत्वावधान में पूरे पृथ्वी पर ‘बाबा नाम केवलम्’ का अहर्निश संकीर्त्तन चल रहा है। इस कीर्तन के प्रवर्त्तक महाकौल सद्गुरु श्री श्री आनन्दमूर्त्ति जी ने कीर्त्तन की महिमा का बखान करते हुए कहा है कि जो भी इसका संकीर्त्तन करेंगे वे अल्प काल में सभी प्रकार के द:ख से निजात पायेंगे तथा विपदाओं से अप्रभावित रहेंगे।

अपने वक्तव्य जारी रखते हुये उन्होंने कहा कि इस युग संक्रमण-काल के अन्तिम पड़ाव में प्राकृतिक शक्तियों की विभीषिका से बचने के लिये अधिक से अधिक ‘बाबा नाम केवलम्’ सिद्ध महामन्त्र का अखण्ड कीर्त्तन का आयोजन अत्यन्त आवश्यक है। इसके लिये हरिपरिमण्डल गोष्ठी संगठित/बनाने की महती आवश्यकता है।

मौके पर उपस्थित आचार्य जगदात्मानन्द अवधूत ने कहा कि कीर्त्तन में साधक-असाधक सभी भाग ले सकते हैं। आचार्य नित्यज्ञानानन्द अवधूत ने कहा कि लोगों में व्याप्त रुढ़ीवादी विचारों तथा परम्पराओं को छोड़ने तथा ईश्वर-केन्द्रित शुद्ध व युक्ति-संगत विचारों के पोषण करने का समय आ गया है। ‘सेवा धर्म मिशन’ प्रगतिशील आध्यात्मिक लोगों को एक मंच पर लाने के लिये कटिबद्ध है।

सामान्य जन मानस को मानव जीवन के यथार्थ को बताने तथा उनमें शुद्ध ईश्वरीय भाव-भक्ति जगाने के लिये ‘हरिपरिमण्डल गोष्ठी’ तैयार करने की आवश्यकता है। अन्त में सेवा धर्म मिशन के दिल्ली सेक्टर के चीफ सेक्रेटरी आचार्य लोकनाथानन्द अवधूत ने सबों को अधिक से अधिक अखण्ड कीर्त्तन आयोजित करने सम्बन्धित आवश्यक दिशा-निर्देश दिया तथा पाॅंच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिये प्रशिक्षणार्थियों को हार्दिक धन्यवाद दिया।

 

Review ‘बाबा नाम केवलम्’ सिद्ध महामन्त्र का अखण्ड संकीर्त्तन.

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