झिरी में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट पर ग्रहण

NH DESK-JHARKHAND

सिटी रिपोर्टर जितेंद्र कुमार

 

रांची: झिरी में कचरा निष्पादन के लिए बनने वाले गेल इंडिया के कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट पर ग्रहण लग सकता है. रिंग रोड से प्लांट तक जाने के लिए स्थानीय ग्रामीण सड़क के लिए जमीन देने को तैयार नहीं है. उनकी मांग है कि जमीन के एवज में नगर निगम उन्हें कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट में मुआवजे के साथ स्थायी नौकरी भी दे. जो स्थिति है उसे देखते हुए लग रहा है कि सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण करना पड़ेगा. इस प्रक्रिया में रांची नगर निगम को रांची जिला प्रशासन की मदद लेनी पड़ेगी.

पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में डेढ़ से दो साल का समय लग जाएगा. पहले नगर निगम झिरी में कचरा हटाकर प्लांट तक सड़क बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन कचरा का पहाड़ होने के कारण सड़क बनाने की अनुमानित बजट छह से सात करोड़ तक पहुंच गया. ऐसे में निगम ने सड़क के लिए रास्ता देने के लिए स्थानीय ग्रामीणों से संपर्क किया, लेकिन ग्रामीणों से जमीन देने के लिए निगम के सामने शर्त रख दी.

अब गेल इंडिया से निगम ने किया है करार

इसी साल 19 मार्च को गेल इंडिया लिमिटेड और रांची नगर निगम के बीच कचरा से गैस उत्पादन को लेकर एमओयू हुआ. एमओयू के तहत रांची में प्रतिदिन 300 टन ऑर्गेनिक कचरा का प्रोसेसिंग कर करीब 10 टन प्रतिदिन कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन का लक्ष्य रखा गया.

इसके लिए गेल इंडिया लिमिटेड 150-150 टन का दो प्लांट लगाएगा. प्रथम चरण में एक प्लांट लगाया जाएगा जिसके निर्माण में करीब एक से डेढ़ साल में पूरा करने का समय रखा गया है.

पहले फेज में निगम द्वारा झिरी में आठ एकड़ जमीन गेल इंडिया लिमिटेड को उपलब्ध की बात हुई. अगर जरुरत पड़ी तो वहीं दूसरे फेज में नगर निगम अतिरिक्त जमीन का भी व्यवस्था करेगा. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद रांची नगर निगम द्वारा कचरे के प्रसंस्करण पर किए जा रहे खर्च से सलाना 81 करोड़ रुपया बचा सकेगा. इसके लिए गेल को रांची नगर निगम द्वारा 7 एकड़ जमीन आवंटित कराया गया है.

कई सालों से प्लांट बनाने की बन रही है योजना

राजधानी रांची से हर दिन सैंकड़ो टन कचरों का उठाव होता है, जिसे झिरी में डंप किया जाता है. झिरी कचरा के पहाड़ के निष्पादन के लिए कई बार निगम ने योजना बनाई. लेकिन दो कंपनी बीच में ही काम छोड़कर रांची से भाग गईं.

पहली बार 2011 में झिरी से कचरे से बिजली पैदा करने की योजना बनी थी. तब शहर की सफाई का जिम्मा संभाल रही तत्कालीन एटूजेड कंपनी को यह काम मिला था. पर कंपनी ने करीब ढाई साल तक शहर की सफाई का काम किया. लेकिन इस दिशा में कुछ भी काम नहीं शुरू हुआ. उसके बाद एस्सेल इन्फ्रा के साथ अक्टूबर 2015 में झिरी में प्लांट लगाने का एग्रीमेंट किया गया. इसके तहत कंपनी को शहर से कूड़ा का उठाव करने के साथ ही पावर प्लांट लगाने का काम भी करना था. फिर भी प्लांट की नींव तक नहीं पड़ी.

 

Review झिरी में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट पर ग्रहण.

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