निजी क्षेत्र में ₹40 हजार तक की नौकरी 75 प्रतिशत स्थानीय को

NH DESK JHARKHAND

जलेश कुमार,रांची:

बुधवार का दिन झारखंडियों के लिए खास रहा, झारखंडियों को प्राइवेट सेक्टर में 40 हजार तक की नौकरी का विधेयक सदन के भीतर बिना रुकावट के आसानी से पास हो गया! इस विधेयक के कानून बन जाने से अब झारखंड के स्थानीय युवाओं को निजी क्षेत्र की कंपनियों में 40 हजार रूपये वेतन तक की नौकरी मिलना आसान हो जायेगा!

झारखंडियों को निजी कंपनियों में 75 फीसदी आरक्षण का विधेयक बजट सत्र के दौरान भी पेश किया गया था, मगर विपक्षी दलों के विरोध के बाद इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया था और ये बिल विधानसभा में लटक गया था! मगर प्रवर समिति ने जरुरी बदलाव के साथ इस बिल को दोबारा विधानसभा में पेश होने के लिए भेजा!ये बिल पहले गुरूवार को विधानसभा में पेश होना था! बिल एक दिन पहले बुधवार को ही विधानसभा में पेश भी हो गया और पास भी हो गया!

जैसा कि मालूम हो बीजेपी के ज्यादातर विधायक सदन से बाहर विधानसभा घेराव के कार्यक्रम में व्यस्त थे! सरकार ने इसे ही मौके के तौर पर इस्तेमाल किया और बिल को सदन में आसानी से पास करा लिया!

क्या है नए कानून में?

झारखंड राज्य के अंदर निजी कंपनियों के 40 हजार तक के वेतन वाले 75 फीसदी पदों पर झारखंड के स्थानीय लोगों की भर्ती अनिवार्य होगी! श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने विधानसभा में बीते मंगलवार को विपक्ष के हंगामे के बीच झारखंड के स्थानीय उम्मीदवारों का नियोजन अधिनियम 2021 पर गठित प्रवर समिति की रिपोर्ट पेश की! यह विधेयक पिछले बजट सत्र में पास नहीं हो पाया था!

इस कानून के दायरे में केंद्र और राज्य सरकार के उपक्रम नहीं आएंगे, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार के उपक्रमों के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली आउटसोर्स कंपनियां इसके दायरे में रखी गयी है! यह दस या दस से अधिक व्यक्तियों का नियोजन करने वाली उन सभी संस्थाओं/कंपनियों पर भी लागू होगा, जिन्हे समय-समय पर सरकार की ओर से अधिसूचित किया जाता है! प्रवर समिति की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों को स्थापित करने के कारण जो स्थानीय लोग विस्थापित हुए है, उनलोगों के साथ-साथ संबंधित जिले के स्थानीय उम्मीदवार व समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व को रोजगार देने में ध्यान में रखना होगा! लेकिन, इसका लाभ तभी मिलेगा जब उम्मीदवार नियोजन संबंधी पोर्टल पर खुद को पंजीकृत कर लेगा!

जुर्माना का भी प्रावधान:

इस कानून का अनुपालन कराने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर एक जांच समिति बनेगी! इसके सदस्य संबंधित संस्था, उस स्थान के स्थानीय निकाय या निमित प्रतिनिधि, डीडीसी, संबंधित अंचलाधिकारी, श्रम अधीक्षक व जिला नियोजन पदाधिकारी होंगे! समिति की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकारी कंपनी के दावे को स्वीकृत या खारिज कर सकेगा! जांच समिति के आदेश से संतुष्ट नहीं होने पर कंपनी 60 दिन में अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेगी! कानून का उल्लंघन करने पर दस हजार से लेकर पांच लाख रूपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा! दोष साबित होने पर प्रतिदिन एक से पांच हजार रूपये जुर्माना वसूलने का प्रावधान भी किया गया है!रांची: बुधवार का दिन झारखंडियों के लिए खास रहा, झारखंडियों को प्राइवेट सेक्टर में 40 हजार तक की नौकरी का विधेयक आज सदन के भीतर बिना रुकावट के आसानी से पास हो गया! इस विधेयक के कानून बन जाने से अब झारखंड के स्थानीय युवाओं को निजी क्षेत्र की कंपनियों में 40 हजार रूपये वेतन तक की नौकरी मिलना आसान हो जायेगा!

झारखंडियों को निजी कंपनियों में 75 फीसदी आरक्षण का विधेयक बजट सत्र के दौरान भी पेश किया गया था, मगर विपक्षी दलों के विरोध के बाद इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया था और ये बिल विधानसभा में लटक गया था! मगर प्रवर समिति ने जरुरी बदलाव के साथ इस बिल को दोबारा विधानसभा में पेश होने के लिए भेजा!ये बिल पहले गुरूवार को विधानसभा में पेश होना था! बिल एक दिन पहले बुधवार को ही विधानसभा में पेश भी हो गया और पास भी हो गया!

जैसा कि मालूम हो बीजेपी के ज्यादातर विधायक सदन से बाहर विधानसभा घेराव के कार्यक्रम में व्यस्त थे! सरकार ने इसे ही मौके के तौर पर इस्तेमाल किया और बिल को सदन में आसानी से पास करा लिया!

क्या है नए कानून में?

झारखंड राज्य के अंदर निजी कंपनियों के 40 हजार तक के वेतन वाले 75 फीसदी पदों पर झारखंड के स्थानीय लोगों की भर्ती अनिवार्य होगी! श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने विधानसभा में बीते मंगलवार को विपक्ष के हंगामे के बीच झारखंड के स्थानीय उम्मीदवारों का नियोजन अधिनियम 2021 पर गठित प्रवर समिति की रिपोर्ट पेश की! यह विधेयक पिछले बजट सत्र में पास नहीं हो पाया था!

इस कानून के दायरे में केंद्र और राज्य सरकार के उपक्रम नहीं आएंगे, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार के उपक्रमों के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली आउटसोर्स कंपनियां इसके दायरे में रखी गयी है! यह दस या दस से अधिक व्यक्तियों का नियोजन करने वाली उन सभी संस्थाओं/कंपनियों पर भी लागू होगा, जिन्हे समय-समय पर सरकार की ओर से अधिसूचित किया जाता है! प्रवर समिति की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों को स्थापित करने के कारण जो स्थानीय लोग विस्थापित हुए है, उनलोगों के साथ-साथ संबंधित जिले के स्थानीय उम्मीदवार व समाज के सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व को रोजगार देने में ध्यान में रखना होगा! लेकिन, इसका लाभ तभी मिलेगा जब उम्मीदवार नियोजन संबंधी पोर्टल पर खुद को पंजीकृत कर लेगा!

जुर्माना का भी प्रावधान:

इस कानून का अनुपालन कराने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तर पर एक जांच समिति बनेगी! इसके सदस्य संबंधित संस्था, उस स्थान के स्थानीय निकाय या निमित प्रतिनिधि, डीडीसी, संबंधित अंचलाधिकारी, श्रम अधीक्षक व जिला नियोजन पदाधिकारी होंगे! समिति की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकारी कंपनी के दावे को स्वीकृत या खारिज कर सकेगा! जांच समिति के आदेश से संतुष्ट नहीं होने पर कंपनी 60 दिन में अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेगी! कानून का उल्लंघन करने पर दस हजार से लेकर पांच लाख रूपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा! दोष साबित होने पर प्रतिदिन एक से पांच हजार रूपये जुर्माना वसूलने का प्रावधान भी किया गया है!

Review निजी क्षेत्र में ₹40 हजार तक की नौकरी 75 प्रतिशत स्थानीय को.

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