प्रतिभाओं ने बाराबंकी की धरती को अपनी साधना भूमि बनाया

बाराबंकी। जनपद की धरती साहित्यिक रूप से उर्वरा है और प्राकृतिक रूप से आकर्षक भी जहां एक ओर धरती ने अनेक साहित्यकार दिए हैं, वहीं बाहर से आकर अनेक प्रतिभाओं ने इस धरती को अपनी साधना भूमि बनाया है, जिनमें संत चतुर्भुज दास जी, कल्पनाथ सिंह जी, कुलान्त नाग जी, बृजेश कुमार ब्रजनंदन जी, बाबूलाल कुशमेश जी सहित अनेक ऊर्जावान साहित्यकार रहे हैं।

उक्त विचार पूर्वज साहित्यकार बाबूलाल कुशमेश की साधना भूमि पर पहुंची जन्मभूमि दर्शन यात्रा के स्वागत समारोह में बोलते हुए डॉक्टर श्यामसुंदर दीक्षित ने कुशमेश भवन पर व्यक्त किए।

सोमवार को पूर्वज जन्मभूमि दर्शन यात्रा के समापन चरण को संत कवि बैजनाथ उद्यान से उपन्यासकार एवं गीतकार उमाशरण वर्मा ‘करुण’ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यात्रा संरक्षक राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त अवधी सम्राट डॉ. राम बहादुर मिश्र ने कहा कि साहित्यिक इतिहास संकलन में आचार्य रामचंद्र शुक्ल के बाद बाराबंकी ने जो अगुवाई की है वह पूरे देश और प्रदेश के लिए प्रेरणा का काम करेगी।

यात्रा के दौरान साहित्यकारों के विषय में संग्रहीत तथ्य एवं आंकड़े लेकर जो पुस्तक रची जा रही है वह निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगी और यह पुस्तक आने वाले शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शिका एवं संदर्भ पुस्तिका के रूप में उपयोगी सिद्ध होगी। इस मौके पर कपिल देव कुशमेश ने यात्रा दल में शामिल समस्त सह यात्रियों को अंग वस्त्र, बैग, लेटर पैड, पेन इत्यादि देकर सम्मानित किया।

यात्री दल में संरक्षक डॉ. राम बहादुर मिश्र, अजय सिंह गुरु, डॉ. विनय दास, डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित, संयोजक पंकज कँवल, अध्यक्ष प्रदीप सारंग, डॉ. बलराम वर्मा, विष्णु कुमार शर्मा ‘कुमार’, अनुपम वर्मा, रजत बहादुर वर्मा, शशिप्रभा, दिनेश वर्मा, ओपी वर्मा ओम, सनत कुमार अनाड़ी, धीरेंद्र चौधरी, हिमांशु श्रीवास्तव, प्रदीप महाजन एवं ज्ञानेंद्र पाठक आदि मौजूद रहे।

यात्रा दल सबसे पहले पूर्वज साहित्यकार बाबूलाल कुशमेश की साधनाभूमि पर पहुंचा, उसके बाद क्रमशः हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ‘अज्ञात’ जी, त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल जी एवं नेवली स्थित सुंदर लाल वर्मा की साधनाभूमि पर पहुँच कर यात्रा दल ने पूर्वज साहित्यकारों को श्रद्धांजलि अर्पित की

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