अस्पतालों की बिगड़ी व्यवस्थाओं को दर्शाता नाटक “हॉस्पिटल”

NH DESK JHARKHAND

प्रत्येक हफ्ते की तरह इस रविवार की शाम भी कडरू स्थित “झारखंड फिल्म एंड थियेटर एकेडमी” के मिनी सभागार में हिंदी नाटक “हॉस्पिटल – इट्स ऑल अबाउट सिस्टम” का सफल मंचन किया गया।

नाटक नाटक का विषय था अस्पतालों की गैरजिम्मेदार व्यवस्था। दरअसल ये कहानी एक लेखक की है जिसे अस्पताल के रिकॉर्ड रिपोर्ट में मृत घोषित कर दिया जाता है, और उसके नाम डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। अब शुरू होती है लेखक की जद्दोजहद खुद को जिंदा साबित करने की, जबकि वो इस काम में नाकाम साबित हो जाता है, संचालक से लेकर स्वास्थ्य मंत्री से लेकर डॉक्टर, नर्स और दूसरे स्टाफ सभी अपना पल्ला झाड़ते नजर आते हैं। नाटक के अंत में दिखाया जाता है किस तरह कि एक बूढ़ी मां अस्पताल से अपने मृत बेटे की लाश मांगने के लिए गिड़गिड़ाते रह जाती हैं, जबकि हॉस्पिटल एक ही बात दोहराता रह जाता है “जब तक हम पूरी तरह से पुष्टि नहीं कर लेते तब तक हम इसे मृत नहीं मान सकते”, और बूढ़ी मां गिड़गिड़ाते और रोते रह जाती है।

नाटक में अभिनय करने वाले कलाकारों में शामिल थे मानव जालान, नेहा कुमारी, अभिषेक साहू, आयुष शर्मा, जगदीश प्रजापति, अभिषेक राय और वर्षा कुमारी।

Review अस्पतालों की बिगड़ी व्यवस्थाओं को दर्शाता नाटक “हॉस्पिटल”.

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