250 करोड़ खर्च कर हटेगा रांची के झिरी में 42 एकड़ में फैला कचरे का पहाड़, इस माडल के कैटवाक से आया था चर्चा में

NH DESK-JHARKHAND

सिटी रिपोर्टर:जितेंद्र कुमार

रांची, [जितेंद्र कुमार]। राजधानी रांची के झिरी में स्थापित कचरे का पहाड़ बायो माइनिंग कर हटाया जाएगा। इसके लिए सूडा ने खर्च का प्रारंभिक आकलन तैयार कर लिया है। झिरी में बायो माइनिंग कर कचरा हटाने में ढाई सौ करोड़ रुपए खर्च होने का आकलन किया गया है। सूडा ने केंद्रीय शहरी मंत्रालय को पत्र लिखकर रकम आवंटित करने की मांग की है। साथ ही बायो माइनिंग का डीपीआर भी तैयार होगा। इसके लिए कंसलटेंट का चुनाव हफ्ते भर में कर लिया जाएगा। सूडा की देखरेख में जुडको बायो माइनिंग का डीपीआर तैयार करएगी।

झिरी में 42 एकड़ में कचरे का फैलाव है। यहां 24 से अधिक वर्ष से कचरा फेंका जा रहा है। यहां कचरे का काफी ऊंचा पहाड़ तैयार हो गया है। इस कचरे को अब बायो माइनिंग कर खत्म किया जाएगा। बायो माइनिंग का काम नगर निगम कराएगा। इसके लिए डीपीआर तैयार करने और कंपनी चयन करने की जिम्मेदारी सूडा को दी गई है। बायो माइनिंग के तहत वैज्ञानिक ढंग से कचरे का निस्तारण किया जाएगा। जो धातुएं निकलेंगी उन्हें गलाकर उनसे धातु बनाई जाएगी।इसके अलावा प्लास्टिक को गलाकर नया प्लास्टिक बनाया जाएगा। अन्य कचरे से ईंधन बनाया जाएगा। इसके अलावा 10 अन्य शहरों आदित्यपुर, चास, देवघर, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, जमशेदपुर, मानगो और रामगढ़ के कचरा डंपिंग यार्ड में कई साल से जमा कचरा भी हटाया जाएगा। इसे भी बायो माइनिंग प्रणाली के तहत रिसाइकिल किया जाएगा।

बायोगैस प्लांट बनाने के लिए समतल हो रही जमीन

झिरी में कचरे के निस्तारण के लिए गेल बायोगैस प्लांट लगाने जा रही है। इस पर 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्लांट में जो नया कचरा झिरी पहुंचेगा, उससे बायोगैस बनाई जाएगी। बायोगैस के निर्माण के लिए टूर ट्रेंचिंग और जमीन के समतलीकरण का काम चल रहा है।सड़क बनने के बाद शुरू होगा प्लांट का निर्माण

झिरी में रिंग रोड से बायोगैस प्लांट की चिन्हित साइट तक नगर निगम लगभग 600 फीट लंबी डबल लेन सड़क बनाएगा। इस सड़क के निर्माण के लिए डीपीआर तैयार किया जा रहा है। डीपीआर स्वीकृत होने के बाद इसका टेंडर होगा। सड़क के निर्माण पर छह करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह सड़क इसलिए बनाई जा रही है, ताकि गेल को बायोगैस प्लांट स्थापित करने में आसानी हो। इस सड़क के निर्माण के बाद बायोगैस प्लांट के निर्माण का कार्य तेजी से शुरू होगा। बायोगैस प्लांट के लिए झिरी के बगल में नगर निगम ने गेल को 7 एकड़ जमीन दे दी है। इस बायोगैस प्लांट में गीले कचरे से बायोगैस तैयार की जाएगी।शहर के चार केंद्रों पर सीडीसी कंपनी करेगी सूखे कचरे का निस्तारण

शहर के चार केंद्रों पर रांची नगर निगम द्वारा चुनी गई सीडीसी कंपनी सूखे कचरे का निस्तारण करेगी। सूखे कचरे के निस्तारण के लिए शहर में मधुकम, नागा बाबा खटाल, खेल गांव और मोरहाबादी में चार केंद्र बनाए जा रहे हैं। यह केंद्र 50 डिसमिल जमीन पर बनाए जाएंगे। इन केंद्रों पर सूखे कचरे का निस्तारण कर सीडीसी कंपनी इससे पॉलिथीन, टी-शर्ट, जूता आदि का निर्माण करेगी। कचरा निस्तारण के लिए मशीनें लगाई जाएंगी।

‘झिरी में अभी जो कचरे का पहाड़ है। इसे बायो माइनिंग कर खत्म किया जाएगा। बाद में जो भी कचरा झिरी पहुंचेगा, उनमें से गीले कचरे से बायोगैस प्लांट में बायोगैस बनाई जाएगी। जबकि सूखे कचरे को शहर के ही 4 केंद्रों पर निस्तारित किया जाएगा।’ –रजनीश कुमार, उप नगर आयुक्त रांची नगर निगम।

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